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चिंताजनक: सिंधु में मिले माइक्रोप्लास्टिक, संकट में डॉल्फिन; जैव विविधता और मानव सेहत दोनों के लिए बना खतरा

Mon, 29 Sep 2025 06:35 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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डॉल्फिन - फोटो : अमर उजाला
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सिंधु (इंडस) नदी की डॉल्फिनों के पाचन तंत्र की नली यानी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (जीआईटी) में औसतन 286 से अधिक माइक्रोप्लास्टिक कण मिले है। यह अन्य व्हेल डॉल्फिन वर्ग के जीवों की तुलना में काफी अधिक हैं। यह शोध प्लोस वन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और इसमें बताया गया है कि डॉल्फिनों का स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता प्लास्टिक प्रदूषण से गहराई से प्रभावित हो रही है।

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अध्ययन 2019 से 2022 के बीच मृत पाई गई पांच डॉल्फिनों पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने एफटी-आईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल कर यह आकलन किया। निष्कर्षों में सामने आया कि 94.76 प्रतिशत माइक्रोप्लास्टिक रेशों के रूप में थे, जिनका रंग मुख्यतः नीला या पारदर्शी था और आकार 5 मिलीमीटर से 300 माइक्रोमीटर के बीच था। पॉलीएथिलीन टेरिफ्थेलैट (पीईटी) प्रमुख पाया गया, जो कुल प्लास्टिक का 58.16 प्रतिशत था। इसके बाद शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि डॉल्फिनों द्वारा लगातार प्लास्टिक निगलने से उनके पाचन, प्रतिरक्षा तंत्र और प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही, प्लास्टिक में मौजूद बिस्फेनोल और फ्थेलेट्स जैसे रसायन हार्मोन प्रणाली को भी प्रभावित कर रहे हैं।

नदियों व तटीय क्षेत्रों की सख्त निगरानी
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो डॉल्फिनों की जीवन क्षमता और जनसंख्या पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके लिए उन्होंने कुछ प्रमुख समाधान सुझाए हैंं। प्लास्टिक का उपयोग घटाना और रीसाइक्लिंग बढ़ाना, नदियों व तटीय क्षेत्रों की सख्त निगरानी, डॉल्फिन संरक्षण और प्रबंधन रणनीतियों को मजबूत करना और लोगों में प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाना। इंडस नदी डॉल्फिन जैसे संकटग्रस्त जीवों पर माइक्रोप्लास्टिक का दबाव यह याद दिलाता है कि प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल पर्यावरणीय चुनौती नहीं, बल्कि जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए अस्तित्वगत खतरा बन चुका है।

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