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चिंताजनक: सांसों के जरिए दिमाग में पैठ बना रहा माइक्रोप्लास्टिक, अध्ययन में हुआ खुलासा

Fri, 27 Sep 2024 05:24 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

Microplastic: शोधकर्ताओं को घ्राण पिंड में 16 तरह के सिंथेटिक पॉलीमर और फाइबर के अंश मिले हैं। इन कणों का आकार 5.5 माइक्रोन से 26.4 माइक्रोन के बीच था। जो रेशे मिले हैं उनकी औसत लंबाई 21.4 माइक्रोन थी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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हमारी सांसों के जरिये माइक्रोप्लास्टिक हमारे दिमाग में पैठ बना रहा है। एक नए अध्ययन में पहली बार वैज्ञानिकों को मस्तिष्क के उस हिस्से में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी के सबूत मिले हैं, जो सूंघने की क्षमता को नियंत्रित करता है। यह इस बात का भी सबूत है कि इंसानी शरीर में प्लास्टिक के इन महीन कणों की मात्रा अनुमान से कहीं ज्यादा हो सकती है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधकर्ताओं के इस अध्ययन के नतीजे जर्नल जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित हुए हैं।

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अध्ययन के नतीजे दर्शाते हैं कि ब्राजील के साओ पाउलो में पोस्टमार्टम किए गए 15 शवों में से आठ के मस्तिष्क में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी के सबूत मिले हैं। प्लास्टिक के यह बेहद महीन कण मस्तिष्क के घ्राण पिंड (ऑल्फेक्ट्री बल्ब) नामक हिस्से में मौजूद थे जो हमारे सूंघने की क्षमता को प्रभावित करता है।

घ्राण पिंड में 16 तरह के सिंथेटिक पॉलीमर के अंश
शोधकर्ताओं को घ्राण पिंड में 16 तरह के सिंथेटिक पॉलीमर और फाइबर के अंश मिले हैं। इन कणों का आकार 5.5 माइक्रोन से 26.4 माइक्रोन के बीच था। जो रेशे मिले हैं उनकी औसत लंबाई 21.4 माइक्रोन थी। अध्ययन में लिए गए नमूनों में पॉलीप्रोपाइलीन के अंश भी मिले हैं। ये रेशे और कण दोनों के रूप में मौजूद था।
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बेहद चिंता की बात
शोधकर्ताओं के मुताबिक, घ्राण पिंड में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी मस्तिष्क के अन्य हिस्सों तक इसके पहुंचने के संभावित मार्ग की ओर भी इशारा करती है। मस्तिष्क में इनकी मौजूदगी बेहद चिंता का विषय है, क्योंकि कि रक्त मस्तिष्क अवरोध, दिमाग के लिए एक सुरक्षा कवच जैसा है। यह रक्त में मौजूद हानिकारक चीजों जैसे विषाक्त कणों से दिमाग को सुरक्षित रखता है। दिमाग में इन कणों की मौजूदगी बड़े खतरे की ओर इशारा करती है।

16.2 कण निगल रहे हर घंटे
अध्ययन के अनुसार, इन्सान सांस के जरिये हर घंटे माइक्रोप्लास्टिक्स के करीब 16.2 कण निगल रहे हैं। निगले गए इस प्लास्टिक्स की मात्रा कितनी ज्यादा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि हफ्ते भर निगले गए इन कणों को जमा किया जाए तो इनसे एक एटीएम कार्ड बनाने जितना प्लास्टिक इकट्ठा हो सकता है। ऐसे भी सबूत मिले हैं कि माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में आने के बाद आंत में कैंसर कोशिकाएं तेजी से फैल सकती हैं।

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