116 मरीजों पर हुआ अध्ययन
जानकारी के अनुसार, इस अध्ययन में कुल 116 मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें बचपन में मानसिक विकारों को लेकर परेशानियां रहीं। तीन साल के अंतराल पर इन मरीजों से लिए दो बार रक्त के नमूने लिए गए और उसमें मौजूद बाह्य कोशिकाओं को रक्त सीरम से निकालने के बाद इसकी विशेषता बताई गई।
शोधकर्ताओं ने बाह्य कोशिकाओं से पैदा होने वाले माइक्रो आरएनए को प्राप्त करने के लिए नमूनों के सीक्वेंस किए। इसके बाद मरीजों को चार समूह में रखा गया। हालांकि इससे उन्हें कोई सांख्यिकी महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला लेकिन इसके परिणामों का उपयोग भविष्य के मेटा-विश्लेषण जांच में किया जा सकता है।
भविष्यवाणी करना होगा संभव
आणविक जीव विज्ञान के प्रो. मार्कोस लेइट सैंटोरो का कहना है कि इस अध्ययन के बाद भविष्य में माइक्रो आरएनए को लेकर भविष्यवाणी करना आसान होगा। भविष्य में डीएनए, एक्सोसोम और पर्यावरण को लेकर एकीकृत भविष्यवाणियां करना संभव होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह आगामी दिनों में माइक्रो आरएनए को लेकर वैज्ञानिक शोध बढ़ाएंगे, वैसे वैसे इसकी ताकतों के बारे में दुनिया को पता चलेगा।