केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने खतरनाक ऑपरेशनों में घायल होने के बाद दिव्यांग हुए कार्मिकों को 'युद्ध चोट भत्ता' देने के मकसद से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) से एक विस्तृत प्रपोजल मांगा है। खास बात है कि यह प्रपोजल, सीआरपीएफ द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के मद्देनजर मांगा गया है। सीआरपीएफ ने 'युद्ध चोट भत्ते' को लेकर एक बहुत ही कारगर प्रस्ताव तैयार किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीआरपीएफ का वह प्रस्ताव ठीक लगा। इसके बाद गृह मंत्रालय के पुलिस-2 प्रभाग (पुनर्वास एवं कल्याण निदेशालय) ने बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी और असम राइफल के महानिदेशकों से उक्त प्रस्ताव देने के लिए कहा है। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ से 'युद्ध चोट भत्ता' से संबंधित प्रस्ताव को लेकर अतिरिक्त जानकारी मांगी है।
सीआरपीएफ ने तैयार किया था प्रस्ताव…
बता दें कि पिछले दिनों सीआरपीएफ ने 'युद्ध चोट भत्ते' को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया था। वजह, नक्सल प्रभावित क्षेत्र, उत्तर पूर्व और जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ, बड़े पैमाने पर तैनात है। इस बल के जवान कई राज्यों में नक्सलियों, उत्तर पूर्व में उग्रवादियों और जेएंडके में दहशतगर्दों से लोहा ले रहे हैं। जोखिम भरे ऑपरेशनों में जवानों और अफसरों को शहादत तक देनी पड़ रही है। ऐसे ऑपरेशनों में अनेक कार्मिक घायल हो जाते हैं। उन्हीं दिव्यांग कार्मिकों के कल्याण के लिए 'युद्ध चोट भत्ता' देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसलिए जरूरी है ‘युद्ध चोट भत्ता' …
सीआरपीएफ ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि देश की आंतरिक सुरक्षा जैसे कर्तव्यों का निर्वहन करने के दौरान तलाशी अभियानों या ऑपरेशनल गतिविधियों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बहुत से जवानों को छर्रे लगने व आईईडी ब्लास्ट में उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे हाथ, पैर, आंख या शरीर के अन्य किसी अंग को नुकसान होने से वे दिव्यांग हो जाते हैं। दिव्यांग होने के बाद उनके सामने बहुत चुनौतियां और कठिनाई आती हैं। कर्तव्य से लौटने के बाद उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं के साथ साथ अतिरिक्त देखभाल/सहायता की जरुरत होती है। इन सब पर अतिरिक्त व्यय भी होता है।
ये होगी युद्ध चोट भत्ते की राशि…
सीआरपीएफ के प्रस्ताव में ऐसे जवानों को सरकारी अनुदान से मासिक भत्ता (1) जिन कार्मिकों को विकलांगता के आधार पर सेवा में बनाए रखना है, उन्हें दस हजार रुपये बतौर दिव्यांग कार्मिक दिया जाए। इस श्रेणी में किसी कार्मिक के एक अंग की हानि (अंग यानी पैर/टांग, हाथ/बांह/आंख, कान की पूर्ण हानि, बोलने की शक्ति की हानि), आदि शारीरिक नुकसान शामिल है। मासिक भत्ता बीस हजार रुपये ऐसे दिव्यांगों को मिलेगा, जिनकी एक से अधिक अंग की हानि हुई है। मासिक भत्ता पंद्रह हजार रुपये, यह उन दिव्यांगों को मिलेगा, जिनकी रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वे अशक्तता की हालत में हैं। दो लाख रुपये का मासिक भत्ता, यह ऐसे दिव्यांगों को मिलेगा, जिन्हें निम्न चिकित्सा श्रेणी के कारण सेवा से अयोग्य/बोर्ड आउट/समय से पूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया है। इस श्रेणी में सीआरपीएफ ने अशक्त कार्मिकों को एकमुश्त अनुदान (वन टाइम ग्रांट) प्रदान करने का अनुरोध किया है।
सभी बलों के प्रमुखों से मांगी जानकारी…
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले सप्ताह सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशकों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि सभी बल अपनी विशिष्ट टिप्पणी के साथ फोर्स में उपलब्ध दिव्यांग कर्मियों की संख्या, इस प्रस्ताव में वित्तीय निहितार्थ और वर्तमान में ऐसे दिव्यांगों को प्रदान किए जा रहे वित्तीय लाभांश/भत्ते के बारे में संपूर्ण जानकारी, इस मंत्रालय की मेल आईडी के माध्यम से अतिशीघ्र उपलब्ध कराई जाए।