केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। अब तक 44,323 करोड़ रुपये राज्यों को जारी किए जा चुके हैं। यह फंड मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्चों के लिए है। सरकार ने पिछली देनदारियों का भी निपटारा किया है।
भारत सरकार ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अब तक कुल 44,323 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। यह जानकारी मंगलवार को लोकसभा में ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी। उन्होंने बताया कि इस फंड से देशभर में ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के लिए मजदूरी, निर्माण सामग्री और प्रशासनिक खर्चों की पूर्ति की जा रही है।
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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मनरेगा योजना के तहत कुल 86,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। यह लगातार दूसरे वर्ष सबसे बड़ी राशि है जो इस योजना के लिए बजट अनुमानों के स्तर पर तय की गई है। मंत्री चौहान ने कहा कि इस राशि में से जुलाई तक लगभग आधी राशि यानी 44,323 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
लंबित देनदारियों का भी किया गया भुगतान
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने एक अलग प्रश्न के जवाब में बताया कि सरकार ने पिछले वित्त वर्ष की लंबित मजदूरी देनदारियों का पूरा भुगतान और निर्माण सामग्री की 50 प्रतिशत देनदारियों का निपटारा कर दिया है। इससे योजना के संचालन में बाधा नहीं आएगी और मजदूरों को समय पर भुगतान मिल सकेगा।
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जरूरत के अनुसार मिलता है अतिरिक्त फंड
शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना है। इसका मतलब यह है कि जब-जब जमीन पर रोजगार की मांग बढ़ती है, तो ग्रामीण विकास मंत्रालय उस आधार पर योजना का संचालन करता है। जरूरत पड़ने पर वित्त मंत्रालय से अतिरिक्त राशि भी मांगी जाती है ताकि मजदूरी और निर्माण कार्य बाधित न हों।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल
मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिनों का गारंटीड रोजगार देने का प्रावधान है। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ बेरोजगारी को कम करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करना है। खेतों की मेड़बंदी, जल संरक्षण और सड़क निर्माण जैसे कार्यों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचता है।
समय पर भुगतान और कार्य की गुणवत्ता
सरकार का दावा है कि मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान की निगरानी नियमित तौर पर की जा रही है। इसके अलावा योजना के कार्यों की गुणवत्ता, मजदूरों के अधिकार और सामाजिक ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।