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Supreme Court: 'अपराध में नाम न होने पर भी PMLA के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है', अदालत की 'सुप्रीम' टिप्पणी

Fri, 24 May 2024 10:45 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: शीर्ष अदालत ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अपराध में नाम न होने का मतलब यह नहीं है कि किसी पर पीएमएलए के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि किसी व्यक्ति का नाम किसी अपराध में नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं कि उस पर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। अदालत में शुक्रवार को कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। 

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सुधीर गुप्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई
न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्थल की अवकाश पीठ ने सुधीर गुप्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। गुप्ता ने याचिका में अपने खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) और उसके बाद की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है। गुप्ता के वकील विजय अग्रवाल ने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज एक मामले में गवाह के रूप में पेश किया गया था लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने याचिकाकर्ता को ही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी बना दिया है। इस पर पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता का नाम विशिष्ट अपराध में नहीं है, इसका मतलब यह नहीं हुआ कि  उन पर पीएमएलए के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति दी 
याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि वह इस मामले में गवाह हैं। इसके जवाब में अदालत ने कहा कि कि इस दलील से पीठ संतुष्ट नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि न तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ईसीआईआर को रद्द किया जा सकता है और उस पर रोक भी नहीं लगाई जा सकती। याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि मामला जून में एक विशेष अदालत के समक्ष आरोपों पर बहस के लिए सूचीबद्ध है। उन्होंने पीठ से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

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