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Maharashtra: एनसीपी गुटों के विलय पर अटकलें तेज, भाजपा नेता बोले- हकीकत नहीं; शरद गुट से भी आई प्रतिक्रिया

Wed, 14 May 2025 05:26 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की तेज होती अटकलों के बीच भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल और एनसीपी (एसपी) नेता अनिल देशमुख ने इसे खारिज कर दिया। दोनों नेताओं ने  इसे सिर्फ मीडिया की चर्चा बताया। साथ ही कहा कि अब तक कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है।
 
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महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल और एनसीपी (सपा) नेता अनिल देशमुख - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने बुधवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट (अजित पवार और शरद पवार) के संभावित विलय की अटकलों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस अटकलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कुछ कभी हुआ ही नहीं, ये सिर्फ चर्चा का विषय रहा है। पाटिल ने कहा कि इस कथित विलय की बात हमेशा हवा में रही है। अब तक कुछ भी ठोस नहीं हुआ है।

महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रतकांत पाटिल ने आगे कहा कि पहले की एकजुट एनसीपी भी तीन लोगों शरद पवार, उनकी बेटी सुप्रिया सुले और भतीजे अजित पवार के इर्द-गिर्द ही घूमती थी। उन्होंने ये भी कहा कि उस वक्त भी जयंत पाटिल और रोहित पवार जैसे नेताओं को दूर रखा गया था। इसलिए ये अटकलें पूरी तरह से गलत है। ये बस चर्चा का विषय है। 

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अनिल देशमुख ने बी विलय की अटकलों को नकारा
इसके साथ ही एनसीपी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बुधवार को शरद पवार और डिप्टी सीएम अजित पवार के गुटों के संभावित विलय की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर एनसीपी (एसपी) खेमे में कोई चर्चा नहीं हुई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान देशमुख ने कहा कि यह सिर्फ मीडिया की चर्चा है। हमारी पार्टी में इस पर कोई बैठक या विचार-विमर्श नहीं हुआ।

शिक्षक नियुक्ति मामले में जांच की मांग

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देशमुख ने आगे नागपुर जिले में सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कथित फर्जी नियुक्तियों की जांच के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाने की मांग की। मामले में उनका आरोप है कि हजारों लोगों ने नकली प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाई है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापम घोटाले से भी बड़ा घोटाला बताया। इसके साथ ही देशमुख ने यह भी कहा कि महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के घटक दल मिलकर निकाय चुनावों के लिए संयुक्त रणनीति बनाएंगे और जहां संभव हो, वहां एकसाथ चुनाव लड़ेंगे।

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एनसीपी की स्थापना से लेकर अलग होने तक, समझिए पूरी कहनी

गौरतलब है कि एनसीपी की स्थापना शरद पवार ने 1999 में की थी। जुलाई 2023 में पार्टी में बड़ी फूट तब पड़ी जब अजित पवार विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल हो गए। इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव से पहले अजित पवार को असली एनसीपी का नाम और चुनाव चिन्ह मिल गया, जबकि शरद पवार को नया नाम एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और नया चुनाव चिन्ह अपनाना पड़ा।

इसी चलते 2023 के विधानसभा चुनावों में शरद पवार की पार्टी को भारी नुकसान हुआ, जबकि अजित पवार गुट को 41 सीटें मिली थीं। हालांकि इन दिनों चर्चा है कि शरद पवार ने हाल ही में कहा कि दोनों गुटों के भविष्य का फैसला सुप्रिया सुले और अजित पवार मिलकर करें, लेकिन भाजपा नेता पाटिल के अनुसार, यह सब सिर्फ कयासबाजी है।

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