देश के सभी होटलों और रेस्टोरेंट्स को दिव्यांग लोगों की सुविधा के मुताबिक सुगम्य (Accessible) बनाना अनिवार्य किया जा चुका है। इस स्पष्ट आदेश के बावजूद देश के कई होटल और रेस्टोरेंट अपने दिव्यांग ग्राहकों को यह सुविधा नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। होटलों के इस व्यवहार से नाखुश निःशक्तजन आयुक्त कार्यालय, दिल्ली ने इनसे जवाब मांगा है।
दरअसल, निःशक्तजन आयुक्त कार्यालय दिल्ली के आयुक्त टीडी धारीवाल ने अपने स्तर पर यह पाया था कि राजधानी के अनेक होटल और रेस्टोरेंट अपने यहां दिव्यांग लोगों को सुगम्यता उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने सुओ मोटो एक्शन लेते हुए राजधानी के सभी होटलों-रेस्टोरेंट्स को अपने सेवा परिसर में दिव्यांग ग्राहकों के लिए सुगम्यता उपलब्ध कराने की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी। इसके जवाब में द फेडरेशन ऑफ होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अपने जवाब में बताया कि उनसे संबद्ध 429 बड़े होटलों और रेस्टोरेंट्स ने अपने यहां सुगम्यता की स्थिति पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है। राजधानी के केवल 38 होटलों ने अपने यहां सुगम्यता होने को लेकर आंशिक जानकारी दी है। इसके बाद संबंधित एजेंसियों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी।
इस मामले पर 16 दिसंबर को सुनवाई हुई। कुछ होटलों ने अपनी अलग-अलग बाध्यताओं को दिखाते हुए अपने परिसर में सुगम्यता उपलब्ध कराने से छूट मांगी थी। लेकिन निःशक्तजन आयुक्त कार्यालय ने इस विषय पर कानून में किसी भी तरह का अलग प्रावधान न होने के आधार पर उन्हें कोई छूट देने से इनकार कर दिया।
एंबिएंस मॉल, वसंत कुंज में स्थित टैकोबेल रेस्टोरेंट ने अपने ग्राहकों को सुगम्यता उपलब्ध कराने से यह कहते हुए छूट मांगी थी कि चूंकि वे एक मॉल में सेवा प्रदान कर रहे हैं, इसलिए सुगम्यता उपलब्ध कराना मॉल की जिम्मेदारी है। लेकिन आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि सुगम्यता उपलब्ध कराना सर्विस प्रदाता कंपनी की जिम्मेदारी है। वह इस आधार पर छूट पाने का हकदार नहीं है कि मॉल के निर्माण या उसके ढांचे में परिवर्तन उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। आदेश में कहा गया है कि सुगम्यता उपलब्ध करवाना उनकी जिम्मेदारी है चाहे तो इसके लिए वे अपनी सेवा का स्थान बदल सकते हैं।