स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच न होने के चलते मानसिक विकारों से जूझ रहे लोगों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं समस्याओं का पता लगाने के लिए जल्द ही देश में चिकित्सा अध्ययन शुरू होगा। यह अध्ययन देश के 765 जिलों के ब्लॉक स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक मल्टीस्टेट टीम का गठन भी किया है।
जानकारी मिली है कि ब्लॉक और जिला स्तर पर मानसिक विकारों से ग्रस्त मरीज अपना इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं। इसके कारणों के बारे में जानकारी न होने के चलते देश के अलग अलग हिस्सों में सरकार की योजनाएं भी बड़ा बदलाव नहीं ला पा रही हैं। इसी के चलते अब आईसीएमआर अलग-अलग राज्य और शोधकर्ताओं के साथ मिलकर पहले अध्ययन पर काम करेगा और फिर इसके परिणाम सरकार के साथ साझा करेगा।
इन्हीं के आधार पर सरकार आगे की नीति तय करेगी। हैरानी यह भी है कि कई लोग स्वास्थ्य कर्मचारियों के संपर्क में रहने के बाद भी साक्ष्य आधारित उपचार नहीं ले पा रहे हैं।
ऊपरी तौर पर कई कारण : आईसीएमआर
आईसीएमआर का मानना है कि नशीले पदार्थों का सेवन सहित मानसिक विकारों के इलाज में भारत बड़े अंतराल का सामना कर रहा है। कई लोग जागरूकता की कमी, कलंक और सीमितता जैसी विभिन्न बाधाओं के कारण आवश्यक देखभाल नहीं ले पा रहे हैं। जो लोग आशा वर्कर, आंगनबाड़ी या स्वास्थ्य कर्मचारियों के संपर्क में है, वह भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से बाहर हैं। इन कारणों को दूर करने के लिए साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप होना जरूरी है।
घर-घर जाकर लोगों को समझाना होगा आसान
बताया जा रहा है कि इस अध्ययन में जब सटीक कारणों का पता चल जाएगा तो उसके बाद सरकार न सिर्फ नीतिगत फैसले लेगी, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारियों का सहयोग लेते हुए घर-घर जाकर लोगों को समझाना आसान होगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी ब्लॉक में मानसिक स्वास्थ्य सेवा नहीं हैं या फिर वहां डॉक्टर नहीं है तो इसके लिए राज्य सरकार कार्य करेगी और फिर स्वास्थ्य कर्मचारी घर जाकर यह बताएगा कि आपके लिए अब डॉक्टर घर के नजदीक उपलब्ध है। ऐसे अलग-अलग कारणों का समाधान और लोगों को उसकी जानकारी दी जाएगी। उम्मीद है कि इससे करीब 70 से 80 फीसदी तक रुकावटों को दूर कर पाने में सफलता मिलेगी।
बीच में ही इलाज छोड़ना घातक
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक विकारों का इलाज बीच में ही छोड़ना नुकसान दे सकता है। इसमें मादक पदार्थों का सेवन करने वाले भी शामिल हैं जिनमें गैर संचारी बीमारियों को बढ़ावा भी मिलता है। मादक पदार्थ उपयोग एक विकार है जिसे एसयूडी कहते हैं। यह एक इलाज योग्य मानसिक विकार है जो किसी व्यक्ति के मस्तिष्क और व्यवहार को प्रभावित करता है, इसके लक्षण मध्यम से गंभीर भी हो सकते हैं।