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चिंताजनक: मानसिक बीमारियां बनीं आत्महत्याओं की सबसे बड़ी वजह, 14 हजार से अधिक लोगों ने दी जान

Wed, 17 Jun 2026 05:38 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में बीमारी से संबंधित कारणों से होने वाली आत्महत्याओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं सबसे बड़ा कारण बनकर उभरीं। मानसिक रोगों, अवसाद, चिंता और मनोवैज्ञानिक तनाव से जूझ रहे हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बीमारी और मानसिक दबाव व्यक्ति को निराशा की ओर धकेल सकते हैं।
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मानसिक बीमारी - फोटो : Adobe Stock Photo
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विस्तार
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भारत में मानसिक स्वास्थ्य का संकट लगातार गहराता जा रहा है। वर्ष 2024 में बीमारी से जुड़ी वजहों के कारण 30,617 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा मानसिक बीमारियों का रहा। कुल 14,305 लोगों ने मानसिक रोगों से जुड़ी परेशानियों के चलते आत्महत्या की, जो बीमारीजनित आत्महत्याओं का 47 प्रतिशत है। यह संख्या पिछले वर्ष के 13,978 मामलों से अधिक है।
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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार बीमारी से जुड़ी आत्महत्याओं में मानसिक बीमारियों का योगदान सबसे अधिक रहा। कुल बीमारीजनित आत्महत्याओं में लगभग हर दूसरी मौत मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी थी। वहीं पुरानी और गंभीर शारीरिक बीमारियां भी आत्महत्या का एक प्रमुख कारण बनी रहीं। मानसिक अवसाद, चिंता विकार, गंभीर मनोवैज्ञानिक तनाव और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का क्या है कहना?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बीमारी झेलने वाले लोगों में अवसाद और निराशा का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आत्महत्या का जोखिम भी बढ़ सकता है। राज्यवार आंकड़े बताते हैं कि बीमारी के कारण होने वाली आत्महत्याओं का बोझ विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। तमिलनाडु में 5,847, महाराष्ट्र में 3,400 और मध्य प्रदेश में 3,254 मामले सामने आए। तेलंगाना में यह संख्या 2,209 और गुजरात में 2,011 रही। कई राज्यों में मानसिक बीमारियों का योगदान बीमारीजनित आत्महत्याओं के मुकाबले अिधक रहा।
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कैंसर और नशे से जुड़े मामले कम
बीमारीजनित आत्महत्याओं में कैंसर, नशे की लत और अन्य विशिष्ट रोगों से जुड़े मामलों का प्रतिशत मानसिक बीमारियों और दीर्घकालिक रोगों की तुलना में काफी कम रहा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में मानसिक और शारीरिक समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं, इसलिए वास्तविक प्रभाव कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।

युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक बीमारियों का बढ़ता बोझ विशेष रूप से युवाओं और कामकाजी आयु वर्ग के लिए चिंता का विषय है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों में आयु-आधारित विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार शैक्षणिक दबाव, रोजगार संबंधी अनिश्चितता, आर्थिक तनाव, सामाजिक अलगाव और डिजिटल जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियां युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, समय पर परामर्श की उपलब्धता और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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