प्रतिभा किसी बेड़ी का मोहताज नहीं होती और किसी के मर्म को सहला दीजिए तो जिंदगी की कहानी बदलने लगती है। कुछ ऐसा ही नजारा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सी-1 ब्लॉक के मनोचिकित्सा वार्ड (बिस्तर संख्या-4) में देखने को मिल रहा है। पूरी कहानी थोड़ी फिल्मी, लेकिन रोचक है। यहां भारतीय सूचना सेवा के अफसर शंभूनाथ चौधरी कई युवा और डिप्रेशन का शिकार हो रहे रोगियों के बीच में आशा की किरण बन रहे हैं। शंभूनाथ न केवल मनोचिकित्सा विभाग में भर्ती रोगियों से नियमित संवाद कर रहे हैं, बल्कि उनके साथ थिरकते हैं और अपने व्यवहार से उनके भीतर सामान्य व्यक्ति जैसा बदलाव लाने की भी कोशिश कर रहे हैं।
पहले कहानी शंभूनाथ चौधरी की
शंभूनाथ चौधरी भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ और बिंदास अफसर हैं। खुद कहते हैं कि यात्रा करना, म्यूजिक पर डांस करना और खाना बनाना उन्हें पसंद है। पिछले कुछ दिनों से उनकी व्हिस्की पीने की लत थोड़ी बढ़ गई थी। वह पैग लगाते और देर शाम लंबी दूरी पर टहलने निकल पड़ते। चार दिन पहले शंभूनाथ ने सुबह-सुबह खाली पेट ही पैग लेना (शराब पीना) शुरू कर दिया। फिर क्या था? उनकी पत्नी ने शराब की लत की छुड़वाने के लिए उन्हें एम्स में भर्ती करा दिया। चिकित्सकों ने शंभूनाथ को सी-1 वार्ड के बिस्तर संख्या 4 को आवंटित करके उनका इलाज शुरू कर दिया है। लेकिन शंभूनाथ को अपना सूचना विभाग के अफसर का दायित्व निभाने की चिंता खाए जा रही है। स्वभाव से बर्हिमुखी, खुश मिजाज और कई प्रतिभाओं के धनी शंभूनाथ वहां अपने साथ छोटा ब्लूटूथ कनेक्टेड स्पीकर ले जाना नहीं भूले हैं। संगीत सुनते हैं और मनोचिकित्सा विभाग में नियम के अनुसार पीछे के हिस्से में डांस भी करते हैं।
मिरगी की बिमारी से ग्रसित ओडिशा का भद्रक भी थिरकता है
18 साल का भद्रक उड़ीसा का रहने वाला है। चार साल से मिरगी का रोगी है। उड़ीसा में मनोचिकित्सकों से इलाज करा चुका है। सोमवार से एम्स में भर्ती है। शंभूनाथ ने अमर उजाला को बताया वह जब एम्स में तो उसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन अब वह माइकल जैक्सन की बीट उनके साथ थिरकता है। वह पैर हिलाने की कोशिश करता है। इसी तरह से मनोचिकित्सा विभाग के वार्ड में 25 से अधिक युवा भर्ती हैं। ये युवा नीट और जेईई की तैयारी कर रहे थे। इनमें से कुछ अवसाद में चले गए थे। कुछ ने मां--बाप या अभिभावकों और कैरियर के दबाव में छत से छलांग लगा ली या जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश की। एकाध के हाथ पैर भी टूटे हैं। एक युवा हाइपर हो जाता है, इसलिए जंजीर से बंधा रहता है। शंभूनाथ बताते हैं कि जब उन्होंने इन युवाओं को देखा तो उन्हें बड़ी तकलीफ हुई। एक हाइपर युवा के कान के पास संगीत की धुन लेकर गए, तो वह धीरे-धीरे अच्छी प्रतिक्रिया देने लगा। आस-पास के रोगी अब शंभूनाथ से बड़ी सहानुभूति रखने लगे हैं। उनके अभिभावकों को भी शंभू की हरकतें ठीक लगने लगी हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि वार्ड में ड्यूटी दे रहा स्टाफ भी शंभूनाथ के प्रयासों को रोकता नहीं है। वह इसे एक तरह का मेडिटेशन मानकर चल रहा है।
काउंसलिंग का रोगियों पर पड़ रहा है अच्छा असर
सूचना विभाग के अफसर ने बताया कि वह आत्महत्या का प्रयास कर चुके एक युवा के अभिभावक के पास गए। इससे पहले उन्होंने उस युवा में अच्छे संकेत देख लिए थे। इसके बाद उनके अभिभावक की काउंसलिंग की कि बच्चे पर दबाव न बनाइए। उदाहरण दिया कि बंदरिया अपने बच्चे को पेट से चिपकाए रहती है और उसका बच्चा अपने रोटी का इंतजाम कर लेता है। हम तो इंसान हैं। शंभू का कहना है कि इतना कहते ही उस युवा ने मुस्कराकर इस लाइन का अभिवादन किया। अब उधर से गुजरने पर वह न केवल देखता है, बल्कि खुश भी होता है। शंभूनाथ बताते हैं कि ऐसे कुछ रोगी हैं, जिनकी चिकित्सक दवा बढ़ाने वाले थे। लेकिन अब अच्छा संकेत देखकर उनके दवा की डोज कम करने की तैयारी कर रहे हैं। सी-1 वार्ड के सुरक्षा गार्ड ने भी बताया शंभू मित्रवत व्यवहार करते हैं। उनके व्यवहार से कुछ मरीजों के चेहरे पर मुस्कान लौटी है। एक अभिभावक ने कहा कि उन्होंने अपने निराश बेटे के चेहरे पर हंसी देखी है। इसके जवाब में शंभू कहते हैं कि हर इलाज दवा ही नहीं है। हमारे व्यवहार भी हैं। मैं तो बस जो समझ में आ रहा है, वही और बिना नियम तोड़े कर रहा हूं। यहां तक कि मेरा ब्लूटूथ स्पीकर भी अस्पताल के मैनुअल के अनुसार रखा जा सकता है। बस म्यूजिक की आवाज धीमी रखनी होती है।
अब वह प्रेम दीवानी भी बदलने का संकेत दे रही है
एक और दिलचस्प केस है। एक युवती है, जिसके प्रेमी का नाम सूरज है। उसके प्रेमी सूरज ने उसे प्रेम में धोखा दे दिया है। लिहाजा वह मानसिक रूप से बीमार हो गई है। उसे सूरज के सिवा कुछ नहीं दिखाई देता। अभिभावक उसका इलाज करा रहे हैं। वार्ड में ही एक रोगी है। इस रोगी का नाम सूरज है। सूरज का नाम सुनकर अब वह युवती उसे ही अपना सूरज समझ बैठी है। बताते हैं इसने भी नई अवस्था को जन्म दे दिया है। शंभूनाथ चौधरी बताते हैं कि बिंदास अंदाज, सही काउंसलिंग और उसे घर के बच्ची की तरह ट्रीट करने से अब उसमें भी अच्छे संकेत दिखाई देने लगे हैं। सामान्य व्यक्ति की तरह अस्पताल में भर्ती शंभूनाथ चिकित्सकों से से अपना संवाद जारी रख रहे हैं।