आज जो कामयाब बिजनेस आप देख रहे हैं, वे उन लोगों के विचारों से जन्मे हैं, जिन्हें लगता था कि कुछ किया जा सकता है और वे बदलाव ला सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आप बदलाव नहीं ला सकते, तो मैं कहूंगा कि आप अपनी क्षमता को परखिए। आप सब कुछ कर सकते हैं, बशर्ते कि आप ऐसा चाहते हों।
अपने देश में जो हुआ है और जो नहीं हो पाया है, उसे लेकर कई बार हमें दुख होता है। दूसरों की उपलब्धियां देखकर कई बार लगता है कि हम यह कभी कर ही नहीं सकते। लेकिन कुछ किया नहीं जा सकता, इसलिए कुछ किया नहीं जाना चाहिए, इस सोच के साथ कभी आगे मत बढ़िए। आप युवा हैं, जो आने वाले वर्षों में देश का नेतृत्व संभालेंगे और इसका भाग्य भी गढ़ेंगे।
जरा अपने आसपास की दुनिया को देखिए कि विकास कैसे होता है। विचारों का जन्म होता कहां है? कैसे लोगों ने गैरेज से शुरुआत की? माइक्रोसॉफ्ट, एपल, अमेजन, गूगल, फेसबुक का जन्म कैसे हुआ? दरअसल, इन सभी का जन्म विचारों से हुआ है। लोगों के यह महसूस करने से हुआ कि कुछ किया जा सकता है। ‘यह नहीं हो सकता’, यह युवाओं की सोच नहीं हो सकती।
कई ऐसी तकनीकें हैं, जिन्हें स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर या 100 एकड़ जमीन की जरूरत नहीं होती। ऐसे बिजनेस हैं, जो आपके दिमाग में पल रहे विचारों में मौजूद भी हैं।
मुमकिन है कि इन विचारों में कुछ पुराने ढर्रे के हों, तो कुछ जोखिम से भरे हों, लेकिन यही कल की दुनिया में बहुत बड़ा बदलाव लाएंगे। आज जो कामयाब बिजनेस आप देख रहे हैं, वे उन लोगों के विचारों से जन्मे हैं, जिन्हें लगता था कि कुछ किया जा सकता है और वे बदलाव ला सकते हैं।
अगर आपको लगता है कि आप बदलाव नहीं ला सकते, तो मैं कहूंगा कि आप अपनी क्षमता को परखिए। आप सब कुछ कर सकते हैं, बशर्ते कि आप ऐसा चाहते हों। एक बात और, कभी भी कमाई गई समृद्धि के आधार पर खुद को कामयाब नहीं मानना चाहिए। अगर आपने कुछ बदलाव किया है, तो रात में घर जाकर आपको उससे संतुष्टि महसूस होनी चाहिए। यही कामयाबी का पैमाना है। जब आप किसी नोबेल पुरस्कार विजेता से बात करते हैं, तो वह कभी नहीं बताता कि उसने नोबेल पुरस्कार जीता है। दूसरे लोग बताते हैं। इसी विनम्रता को अपना आभूषण बनाएं। विफलताएं मिलेंगी, निराशाएं होंगी, लेकिन आपकी अपने विचारों को लेकर प्रतिबद्धता ही आपको अपने आसपास की दुनिया के प्रति सचेत बनाए रखेगी। कल के नए भारत के प्रति मेरा उत्साह अब भी बना हुआ है।
हम सभी देशवासियों को भारत की क्षमता को सामने लाने के लिए उत्सुक होना चाहिए, क्योंकि हम सभी का जोड़ ही तो भारत है। हमने अभी तक ऐसा नहीं किया है। इसलिए आइए, हम सभी अपने दिल और आत्मा से नए भारत की ओर बढ़ने की प्रतिज्ञा लें।
(रतन टाटा द्वारा दिए गए भाषण के संपादित अंश)