हाईकोर्ट ने बसपा सरकार के शासनकाल में हुए 14 अरब रुपये के स्मारक घोटाले में विजिलेंस जांच की प्रगति रिपोर्ट सरकार से तलब की है। इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मिर्जापुर के शशिकांत उर्फ भावेश पांडेय ने कोर्ट में जनहित याचिका दी है। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है।
कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या याची के भाई ने स्मारक निर्माण में सप्लाई की गई सामग्री का भुगतान पाने के लिए कोई सिविल वाद दाखिल किया है। घोटाले की बात सामने आने के बाद तमाम ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया गया था। याची का भाई भी उनमें से एक है।
लोकायुक्त ने जांच रिपोर्ट में 14 अरब, 10 करोड़, 50 लाख 63 हजार रुपये के घोटाले की बात कही थी। इसमें लोक निर्माण विभाग तथा अन्य एजेंसियों के अफसरों, तत्कालीन मंत्रियों नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबूराम कुशवाहा समेत अन्य लोगों की संलिप्तता की बात कही गई। रिपोर्ट में इन सभी पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
याची का कहना है कि लोकायुक्त ने वर्ष 2013 में रिपोर्ट दे दी थी, जिस पर 1 जनवरी 2017 में गोमतीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा जांच विजिलेंस को सौंपी गई। इसी से जाहिर है कि जांच सही नीयत से नहीं की जा रही है। अब जांच सीबीआई को सौंपने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की गई है।