जाधव ने बिल पेश करते हुए कहा कि एनबीएफसी में स्वचालित रूट के जरिए विदेशी निवेशकों को 100 फीसदी स्वामित्व प्राप्त है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हम हाथ में हाथ रखकर विदेशी कंपनियों को एनबीएफसी और पेमेंट फर्मों में हिस्सेदारी पर स्वामित्व देने की स्थिति में हैं? यह देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसके अलावा देश में डाटा सुरक्षा के लिए कानूनों के बिना इस दिशा में आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं है।
लाखों लोगों का निजी और वित्तीय डाटा दांव पर
जाधव ने कहा, विदेशी कंपनियों को एफडीआई के तहत प्राप्त स्वामित्व से देश के लाखों लोगों का निजी व वित्तीय डाटा इन कंपनियों की गिरफ्त में है। इममें नेताओं, सैन्य कर्मियों और आम आदमी की सूचनाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ जाता है। इसका राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है। हमें इस पर तुरंत नकेल कसने की जरूरत है, ऐसे में यह बिल बेहद जरूरी है।
अलीबाबा का दिया उदाहरण
जाधव ने अपनी दलील में चीनी कंपनी अलीबाबा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, दो साल पहले अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर अलीबाबा संस्थापक जैक मा द्वारा पैसा ट्रांसफर करने वाली कंपनी मनीग्राम के अधिग्रहण की योजना को विफल कर दिया था।
इन देशों में एफडीआई पर नकेल
जाधव ने बताया कि चीन जैसे देश ने भी अपने यहां वित्तीय क्षेत्र में एफडीआई को सीमित दखल दिया है। इसके अलावा मलयेशिया, थाइलैंड और इंडोनेशिया ने भी कड़े कदम उठाये हैं। लेकिन भारत में एफडीआई को 74 फीसदी दखल दिया हुआ है।
किसने क्या कहा...
‘देश के अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए एफडीआई जरूरी हो सकता है लेकिन इसके एवज में राष्ट्रीय सुरक्षा पर आंच नहीं आनी चाहिए। देश की सुरक्षा और निजी डाटा की रक्षा सबसे पहले है।
- शिव प्रताप शुक्ला, भाजपा सांसद
‘एफडीआई प्रस्तावों की उच्च स्तर पर कड़ी जांच होनी चाहिए। पूरी तरह से सुरक्षा परख लेने के बाद ही इसे मंजूरी दी जानी चाहिए। इसके लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव बेहद जरूरी है।
- अनिल देसाई, शिवसेना सांसद
‘एफडीआई की जांच के लिए बनने वाली कमेटी का दायरा भी बढ़ाया जाना चाहिए और इसमें सभी को बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी दिखानी चाहिए। इसमें सुरक्षा विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
- राजीव गौड़ा, कांग्रेस सांसद