भारत के भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को सोमवार सुबह बेल्जियम से गिरफ्तार किया गया। चोकसी बीते करीब सात साल से भारतीय एजेंसियों की पकड़ से दूर है। चोकसी की गिरफ्तारी के बाद यह चर्चा है कि क्या 26/11 हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा के बाद चोकसी का प्रत्यर्पण भी कर सकता है?
मेहुल चोकसी का नाम पहली बार 2018 में सामने आया, जब एक विशेष पीएमएलए कोर्ट ने चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी और नीशल मोदी के खिलाफ एक गैर-जमानती वारंट जारी किया। आरोप है कि नीरव और मेहुल ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर बैंक को करीब 13,000 करोड़ रुपये का चूना लगाया। यह बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला कहा जाता है। इन लोगों ने पीएनबी की मुंबई के फोर्ट में स्थित ब्रेडी हाउस ब्रांच के अधिकारियों की मदद से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LoU) के जरिए बैंक से कर्ज पर रकम लेकर विदेशों में ट्रांसफर की।
आरोपियों ने फर्जीवाड़े से LoU की अवधि एक साल तक दिखाई और महंगे आभूषणों का आयात किया, जबकि रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के मुताबिक, इनकी अवधि 90 दिन ही हो सकती है, जिसके बाद कर्ज वापसी जरूरी है। भारतीय बैंकों की विदेश में मौजूद शाखाओं ने आरबीआई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। वे ऐसे दस्तावेज मुहैया कराने में नाकाम रहे, जिसके जरिए विदेश में उनसे कर्ज हासिल किया गया।