भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पीएनबी से 14 हजार करोड़ की धोखाधड़ी में भगोड़ा घोषित मेहुल चोकसी समझ गया था कि एंटीगुआ और बरबुडा में रुका तो उसे भारत को सौंप दिया जाएगा।
वह अपने एक एजेंट की मदद से क्यूबा भागने की फिराक में था ओर जब डोमिनिका में पकड़ लिया गया तो उसने अपने ही अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी। वह जानता था कि अगर जांच होती है तो उसकी यह कहानी सबके सामने आएगी और उसे अपहरण के आधार पर कानूनी लड़ाई में फायदा होगा।
मीडिया में मेहुल की उस एजेंट के साथ तस्वीर सामने आई है। एंटीगुआ में नागरिकता को लेकर मुश्किलों में फंसे मेहुल को आभास हो गया था कि पीएम गेस्टन ब्राउन उसे हर हाल में भारत को सौंप देंगे। इसके बाद खुद को बचाने के लिए उसने क्यूबा भागने की तैयारी की। चोकसी के एंटीगुआ के एक मित्र गोविन ने उसके इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया। एंटीगुआ पुलिस चोकसी की मदद करने वाले एजेंट की तलाश में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक चोकसी के पास एंटीगुआ के अलावा एक और कैरेबियाई देश की नागरिकता थी।
पुलिस को बताया, 10 लोगों ने उसे बुरी तरह पीटा
मेहुल चोकसी ने अपनी चाल के मुताबिक एंटीगुआ के पुलिस आयुक्त को भी झूठी कहानी सुनाई। उसने कहा, जब वह अपनी दोस्त बारबरा से मिलने जा रहा था, उसे आठ से दस लोगों ने बुरी तरह पीटा और एक जहाज में बैठाकर डोमिनिका ले गए। मेहुल ने अपनी मित्र पर भी अपहरण में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा, जब उसे पीटा जा रहा था तब बारबरा ने भी उसे बचाने की कोशिश नहीं की। ऐसा लगता है कि अपहरण की साजिश में बारबरा भी शामिल थी। जबकि बारबरा उसकी अच्छी दोस्त है और दोनों पिछले एक साल से एक दुसरे को जानते थे और रोज मिलते थे। इससे साफ है कि मेहुल की अपहरण की कहानी झूठी है।
एंटीगुआ सरकार का दावा, मेहुल का परिवार भी गढ़ रहा झूठी कहानी
मेहुल की नागरिकता को लेकर जांच कर रही एंटीगुआ सरकार का दावा है कि मीडिया में जो भी कहानी आ रही है वह मेहुल के परिवार द्वारा इरादतन गढ़ी जा रही है ताकि मेहुल को तमाम कानूनी कार्यवाही से बचाया जा सके। इससे उसे भारत आने से बचने में मदद मिले।