केन्द्र सरकार
केन्द्र सरकार राज्य में कानून-व्यस्था समेत तमाम पहलुओं पर राज्यपाल एनएन वोहरा के तालमेल बनाकर स्थिति पर नियंत्रण बनाने में जुटी है। इसकी लिए केन्द्रीय गृहमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लगातार सक्रिय हैं। समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री खुद वहां के हालात की लगातार जानकारी ले रहे हैं। राज्यपाल और केन्द्र सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं।
इनमें पहली अमरनाथ यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कराने की है। दूसरी चुनौती राज्य में घाटी के भीतर शांति एवं कानून व्यवस्था को मजबूती देकर पंचायत स्तर की चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने की है। राज्यपाल एनएन वोहरा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। वह दो महीने के सेवा विस्तार पर हैं। अगस्त महीने में उनका सेवा विस्तार समाप्त हो रहा है। ऐसे इस विषय में भी केन्द्र सरकार द्वारा निर्णय लिया जाना अहम है।
अन्य दलों की स्थिति
कांग्रेस पार्टी के नेता जम्मू में तेजी से आ रहे राजनीतिक बदलाव को लेकर खुश हैं। घाटी को लेकर भी गुलाम नबी आजाद का मानना है कि लोग पीडीपी को लेकर काफी नाराज हैं। उमर अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेस लोगों के बीच में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रही है। कांग्रेस को भी लग रहा है कि समय आने पर उसे भी इसका फायदा मिलेगा। बताते हैं घाटी में ताजा स्थितियां पीडीपी के पक्ष में कम है। लोगों में उसके खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। यही वजह है कि पीडीपी के नेता अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत पर उतर रहे हैं। दिलचस्प यह है कि इन स्थितियों में भी न तो नेशनल कांफ्रेस और न ही कांग्रेस राज्य में सरकार के गठन की प्रक्रिया को लेकर कोई संकेत दे रही है या उत्साह दिखा रही है। माना जा रहा है कि भाजपा के लिए भी यह राहत भरी खबर है।
भाजपा
भाजपा के अभी दोनों हाथ में लड्डू हैं। पहला राज्य में राष्ट्रपति शासन है और केन्द्र भाजपा सत्ता में है। दूसरा भाजपा के सहयोग से बनी पीडीपी लगातार कमजोर हो रही है। पार्टी में विधायकों के बागी जैसे सुर मुखर हैं। समझा जा रहा है कि ऐसे में भाजपा की पहली कोशिश इन हालात के बीच में जम्मू-कश्मीर में अपनी स्थिति मजबूत करने की है। भाजपा लद्दाख क्षेत्र को लेकर भी लगातार संवेदनशील रहती है। पार्टी के रणनीतिकारों को जम्मू-कश्मीर में इस तरह के राजनीतिक हालात मुफीद लग रहे हैं। यह भाजपा का प्लान ए बताया जा रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों के पास एक प्लान बी भी है। वह घाटी में एक नई राजनीतिक ताकत खड़ी करने से जुड़ा है।
अभी तक घाटी में पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस का ही दबदबा रहा है। कांग्रेस कुछ क्षेत्रों में अपना जनाधार रखती है। लेकिन घाटी के भीतर तीसरी राजनीतिक शक्ति के उभार के बाद भाजपा की आगे की राजनीतिक राह आसान रहेगी। पीपुल्स कांफ्रेस के सज्जाद लोन भी वहां एक ताकत बनना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि पीडीपी के बागी रुख अख्तियार करने वाले विधायक भी इस झंडे को उठाने के लिए तत्पर दिखाई दे रहे हैं। यही तबका राज्य में नई सरकार के गठन की संभावना को भी मजबूती दे रहा है।
जम्मू में सक्रिय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक सूत्र की माने तो एक न एक दिन भाजपा जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाएगी। गठबंधन सरकार के सहारे भाजपा राज्य में अपना उप मुख्यमंत्री बना चुकी है। ऐसे में यदि मुख्यमंत्री बनाने का अवसर आए तो बुरा क्या है? माना जा रहा है कि इसके अनुकूल वातावरण को देखकर पार्टी कोई भी दांव लगा सकती है। हालांकि अभी दूर-दूर तक इस तरह की संभावना नजर नहीं आती।