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महबूबा-अब्दुल्ला और कांग्रेसी नेताओं के गले में कांटा बन कर अटक गया 'रोशनी', 'गुपकार' समझौते से बचेगा राजनीतिक करियर!  

Sun, 01 Nov 2020 07:32 PM IST
मुकेश कुमार झा जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला जम्मू, ग्राफिक्स
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जम्मू-कश्मीर में 'रोशनी' एक्ट कई नेताओं का राजनीतिक करियर चौपट कर सकता है। 'रोशनी', मौजूदा समय में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला और कांग्रेस पार्टी के नेताओं के गले का कांटा बन गया है।

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सुरक्षा एवं राजनीतिक विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) ने इस मामले में भाजपा की तारीफ करते हुए कहा, समय रहते यह एक सार्थक पहल हुई है। रोशनी एक्ट के तहत जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा जमीन घोटाला हुआ है। जिन लोगों ने रोशनी के जरिए जमीनों पर कब्जे कराए हैं, उन्हें कोड़ियों के भाव में बेचा है, अब वही लोग 'गुपकार' समझौता कर रहे हैं। गुपकार में किसी बड़ी राजनीतिक क्रांति पर चर्चा नहीं हुई। रोशनी एक्ट मामले की जांच शुरु हो गई है।


अब उन सभी लोगों के नाम सार्वजनिक होंगे, जो रोशनी एक्ट के तहत जमीन के मालिक बने हैं।छह माह में वह जमीन भी वापस ली जाएगी। इन तीनों पार्टियों को अब यही डर सता रहा है, इसलिए वे गुपकार समझौता कर रहे हैं।बतौर अनिल गुप्ता, तीनों पार्टियां अपना राजनीतिक करियर बचाने और रोशनी एक्ट के तहत हुए घोटालों पर पर्दा डालने के लिए विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।
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जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सचिव 'राजस्व विभाग' एक जनवरी 2001 के आधार पर सरकारी जमीन का ब्योरा एकत्र कर उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे। कौन सी जमीन पर किसका कब्जा है, इस बाबत सभी अवैध कब्जाधारकों के नाम सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। रोशनी एक्ट के तहत समय-समय पर हुए तमाम संशोधनों को रद्द किया जा रहा है। सरकारी जमीन पर कब्जाधारकों से जमीन छुड़वाने की कार्ययोजना छह माह के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) के अनुसार, इन तीनों राजनीतिक दलों ने रोशनी एक्ट का जमकर दुरुपयोग किया है। रोशनी एक्ट में मनमर्जी से संशोधन कर सरकारी जमीनों पर कब्जे करा दिए गए। जम्मू-कश्मीर की आम जनता खुश है कि अब रोशनी एक्ट के जरिए घोटाला करने वालों के नाम सार्वजनिक होंगे। श्रीनगर में रोशनी एक्ट के तहत राजनीतिक दलों के कार्यालय भी बन चुके हैं। नेताओं और उनके रिश्तेदारों के अलावा नौकरशाहों व पुलिस के बड़े अधिकारियों ने भी इस एक्ट की मदद से जमीन हासिल की है।

पिछले दिनों श्रीनगर में गुपकार समझौता हुआ है। यह समझौता केवल इसी बात को लेकर हुआ है कि अब रोशनी एक्ट घोटाले से खुद को कैसे बचाएं। इन तीनों दलों के नेताओं ने थोक के भाव में रोशनी एक्ट का फायदा उठाया था। अनिल गुप्ता का कहना है कि अब उन्हें यह डर सताने लगा है कि जब अखबारों में उनके नाम सार्वजनिक होंगे तो जनता के बीच उनका नकाब उतर जाएगा।

इसी के चलते उन्होंने आपस में गुपकार समझौता कर लिया। इसमें उन्होंने अनुच्छेद 370 को दोबारा से लाने की मांग दोहराई है, जबकि हकीकत यह है कि वे रोशनी एक्ट से खुद को कैसे बचाएं, लोगों तक किसी तरह इसकी सच्चाई न पहुंचे, इस बाबत रणनीति बना रहे हैं। महबूबा मुफ्ती, नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला और कांग्रेस पार्टी के नेता, यह बात अच्छे से जानते हैं कि बिना साथ आए वे रोशनी एक्ट पर लोगों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। 

इसके लिए मिलकर रणनीति बनानी जरुरी है। हालांकि अब इन तीनों दलों के नेताओं की पोल खुलनी तय है। जनता समझ चुकी है कि रोशनी एक्ट में क्या कुछ हुआ है।कुछ दिन बाद जब मामले की परतें उठना शुरु होंगी तो इन पार्टियों के नेता जम्मू-कश्मीर के लोगों से नजर नहीं मिला सकेंगे।

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