मेघालय की राजधानी शिलांग में ईडी कार्यालय वाली इमारत पर मोटरसाइकिल सवार दो अज्ञात लोगों ने पेट्रोल बम फेंके। इससे एक दिन पहले स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पर भी हमला हुआ था। सितंबर और अगस्त में भी सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया था। क्या सभी हमलों के पीछे एक ही समूह है? पुलिस सीसीटीवी फुटेज से संदिग्धों की पहचान कैसे करेगी? शहर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
मेघालय की राजधानी शिलांग में सरकारी इमारतों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामले में मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात लोगों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कार्यालय वाली इमारत पर पेट्रोल बम फेंके। यह घटना पूर्वी खासी हिल्स जिले के लैंगकिर्डिंग इलाके में तड़के हुई। पिछले दिन स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पर भी इसी तरह का हमला हुआ था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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ईडी कार्यालय की इमारत पर हमले में क्या नुकसान हुआ?
पुलिस अधीक्षक विवेक सिएम के मुताबिक, पेट्रोल बम फेंके जाने के बावजूद इमारत के ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। घटना के समय इमारत के अंदर तैनात सुरक्षा गार्ड को गुरुवार सुबह तक इसकी जानकारी नहीं थी। पुलिस ने संदिग्धों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में केस दर्ज करने की प्रक्रिया भी की जा रही है। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास गश्त बढ़ा दी है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोकने और संदिग्धों का पता लगाने में मदद मिल सके।
दो दिनों में सरकारी इमारतों पर दूसरा हमला, पहले कहां हुई थी घटना?
ईडी कार्यालय वाली इमारत पर पेट्रोल बम फेंकने की घटना से एक दिन पहले शिलांग के लैतुमखराह इलाके में स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय को निशाना बनाया गया था। लगातार दो दिनों में सरकारी प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस के अनुसार, 20 अक्टूबर को भी शहर में पेट्रोल बम से हमले की तीन संदिग्ध घटनाएं सामने आई थीं। ये घटनाएं केन्च ट्रेस, कीटिंग रोड और लैतुमखराह में हुई थीं। इन मामलों के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी करने और शहर में निगरानी बढ़ाने के कदम उठाए हैं।
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सितंबर में किन सरकारी कार्यालयों और पुलिस परिसरों को बनाया गया था निशाना?
शिलांग में पेट्रोल बम से हमले और आगजनी की घटनाएं केवल अक्टूबर तक सीमित नहीं हैं। सितंबर में भी सरकारी कार्यालयों, पुलिस परिसरों और वाहनों को निशाना बनाया गया था। प्रभावित स्थानों में खनिज संसाधन निदेशालय, लुमडिएंगजरी पुलिस स्टेशन, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय और नोंगमाइनसोंग स्थित एक पुलिस बूथ शामिल थे। इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। गश्त बढ़ाने के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज की मदद से संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश भी की गई थी।
अगस्त में हिंसा के बाद क्या हुआ था और क्या सभी हमले आपस में जुड़े हैं?
इससे पहले अगस्त में खासी स्टूडेंट्स यूनियन की रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद शिलांग में तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान कुछ उपद्रवियों ने नेशनल पीपुल्स पार्टी के कार्यालय और नोंगमाइनसोंग में एक पुलिस चौकी पर पेट्रोल बम फेंके थे। हालांकि, पुलिस ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में हुई ये घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं या नहीं। इन हमलों के पीछे किसी साझा मकसद का भी पता नहीं चला है। फिलहाल पुलिस संदिग्धों की पहचान करने, मामलों की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए काम कर रही है।