मेघालय की ईस्ट जयंतिया पहाड़ियों में स्थित अवैध कोयला खदान में नौसेना के (रिमोटली ओपिरेटिड वाहन) आरओवी से शरीर के विघटित अंगों का पता चला है। इस जॉइंड रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय नौसेना सहित स्थानीय कर्मी, एनडीआरएफ भी शामिल हैं।
ईस्ट जयंतिया पहाड़ियों के जिला प्रशासन प्रवक्ता आर सुसंगी का कहना है, "भारतीय नौसेना के क्रू को रविवार को विघटित शरीर के अंग मिले हैं। रात तक ये ऑपरेशन जारी रहा है।" प्रवक्ता का कहना है कि अभी ये भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं है कि अंग दूसरे शव से संंबंधित हैं, जो शव 26 जनवरी को मिला था।
इस खदान से कोल इंडिया, किर्लोस्कर और केएसबी की टीमों ने 1,40,76,000 लीटर पानी निकाला है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम बचाव दल को पूरी सहायता उपलब्ध करा रही है। बता दें 13 दिसंबर को 15 मजदूर इस खदान में फंस गए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खदान में अधिक सल्फर होने के कारण शवों का अपघटन हो गया है।
आरओवी वाहन को 16 जनवरी को पहला शव मिला था। मजदूर खदान में अचानक पानी भर जाने के कारण फंस गए थे। नौसेना को खुदाई के दौरान इनके हेल्मेट, लकड़ी की गाड़ी आदि भी मिले थे। बचाव दल सभी मजदूरों के शवों को निकालने की पूरी कोशिश करता रहा लेकिन एक भी मजदूर जीवित नहीं बचा। अब इनके शव भी विघटित हो चुके हैं। इनके परिवार भी इतना ही चाहते थे कि इनके शव उन्हें मिल जाएं, ताकि इनका अंतिम संस्तार किया जा सके।
रविवार को बचाव अभियान का 74वां दिन था। यह देश का सबसे लंबा चलने वाला राहत अभियान है। अभियन के प्रवक्ता आर सुसंगी ने कहा कि "पूर्ण रूप से सड़े-गले शव" को देखा गया और इसे निकालने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले दो सड़े-गले शव देखे गए और इनमें से सिर्फ एक बरामद किया जा सका था।
इस बड़े हादसे के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मेघालय सरकार पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। सरकार पर ये जुर्माना अवैध खनन पर रोक लगाने में नाकाम होने के चलते लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि वह बचाव अभियान से संतुष्ट नहीं है।