अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर पूरे देश में माहौल गर्माया हुआ है। इसको लेकर दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में साधु-संतों का जमावड़ा लगा हुआ है। अखिल भारतीय संत समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में करीब तीन हजार साधु-संत शामिल हुए हैं। आज इस सम्मेलन का दूसरा दिन है। यहां मंदिर निर्माण को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर चर्चा हो रही है।
माना जा रहा है कि आज साधु-संतों की ओर से इस मुद्दे पर धर्मादेश जारी किया जाएगा। संतों का कहना है कि अगले महीने दिसंबर में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। हम बिना झुके और बिना रुके मंदिर वहीं बनाएंगे।
इसके लिए राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष राम विलास वेदांती ने एक फार्मूला भी दिया है। उन्होंने कहा है कि मंदिर निर्माण न तो अदालती आदेश से बनेगा और न ही कानून से। मंदिर का निर्माण आपसी सहमति और समझौते से होगा। उन्होंने सहमति के तहत अयोध्या में मंदिर और लखनऊ में मस्जिद निर्माण की बात कही।
हालांकि इस दौरान उन्हें संतों के भारी विरोध का सामना भी करना पड़ा। शनिवार को वेदांती ने जब इसपर समझौते की बात की तो संत हंसदेवाचार्य ने उन्हें तुरंत बैठने को कह दिया। उन्होंने कहा कि मस्जिद किसी भी हालत में नहीं बनेगी। सांप्रदायिक सौहार्द दोनों तरफ से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वेदांती भविष्य में मस्जिद निर्माण की बात न करें।
इसपर वेदांती ने दलील दी कि अगर मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश या कानून लाया जाता है तो कोई भी दंगे होने से नहीं रोक पाएगा। हम हिंसा नहीं शांति से मंदिर निर्माण करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बातचीत हुई है।
वहीं, संतों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के लिए जनवरी, 2019 का समय दिया है, लेकिन निर्माण दिसंबर से ही शुरू कर दिया जाएगा। अब इस मामले को कोर्ट भी नहीं लटका सकता।