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बाघों के संरक्षण के लिए मंथन: मंत्री भूपेंद्र यादव ने की बैठक, जुटे देशभर के टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक

Sun, 28 Jun 2026 09:14 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर

सार

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि बाघ संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए देशभर के टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशकों की बैठक राजस्थान के अलवर में आयोजित की जा रही है। इसमें संरक्षण के अनुभव साझा करने, आवास सुधार, क्षमता निर्माण, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
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बाघ संरक्षण में गुणात्मक सुधार पर मंथन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि सरकार बाघ संरक्षण की रणनीतियों को बेहतर बनाने के लिए देशभर के टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशकों को एक साथ ला रही है। यह बैठक राजस्थान के अलवर में आयोजित की जा रही है।
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मंत्री ने कहा, "सरिस्का में बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू हुए 18 साल हो चुके हैं। देश के टाइगर रिजर्व में खास तौर पर सरिस्का और पन्ना सफलता की मिसाल बने हैं। हालांकि, एक-दो जगह हमारे प्रयोग सफल नहीं रहे। हम देशभर के फील्ड डायरेक्टरों को एक साथ ला रहे हैं, ताकि बाघ संरक्षण क्षेत्रों में गुणात्मक सुधार, अनुभवों के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, आवास क्षेत्रों के विखंडन को कम करने, सहायक नदियों को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सके।"

एनटीसीए की समिति करेगी निष्कर्षों की समीक्षा
यादव ने कहा, "बाघ पुनर्स्थापन अपने आप में एक बड़ा कार्यक्रम है। इसकी सफलता का मूल्यांकन करने के लिए हम यह दो दिवसीय तकनीकी कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसके निष्कर्षों की समीक्षा बाद में एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) की समिति करेगी।"
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उन्होंने कहा, "हमने देशभर के फील्ड डायरेक्टरों को एकत्र किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन क्षेत्रों में कमी है और कहां संसाधन अधिक हैं। इसके आधार पर संतुलन बनाया जा सकेगा और इन क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी बड़ी चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी।"

सुंदरबन को लेकर क्या बोले भूपेंद्र यादव?
भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुंदरबन को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। यह भारत और बांग्लादेश के बीच साझा क्षेत्र है, जहां बाघ दोनों देशों के बीच स्वतंत्र रूप से आवाजाही करते हैं।

उन्होंने कहा, "सुंदरबन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। यह एक अनूठा क्षेत्र है, जहां बाघ जमीन और समुद्री दोनों तरह के पर्यावरण में रहते हैं। एक तरह से यह भारत और बांग्लादेश का साझा क्षेत्र है, जहां बाघ एक देश से दूसरे देश में स्वतंत्र रूप से आते-जाते हैं। इसकी विशिष्ट जैव विविधता को देखते हुए इसे यूनेस्को स्थल घोषित किया गया है। लंबे समय तक इस क्षेत्र की अनदेखी हुई, लेकिन अब हम इसके प्रति अपने दृष्टिकोण की फिर से समीक्षा कर रहे हैं।"
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