फ्रांस में एक अध्ययन में पता चला है कि कोरोना के कारण सामान्य जनसंख्या की तुलना में किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीजों की मौत अधिक हुई है। गुर्दा प्रत्योरोपण वाले मरीजों को अधिक सावधानी बरतनी होगी।
लखनऊ के राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के हेड और यूरोलॉजिस्ट डॉ. ईश्वर राम ध्यान बताने हैं कि किडनी प्रत्यारोपण के मरीजों को क्त्रसनिक इम्युनोसप्रेशन दवाएं दी जाती हैं।
इन दवाओं का काम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता नियंत्रित या कमजोर करना होता जिससे वे प्रत्यारोपित अंग को रिजेक्ट न कर सकें। अंग प्रत्यारोपण वाले हर मरीज को ये दवाएं दी जाती हैं।
ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर की इम्युन सिस्टम प्रत्यारोपित अंग को फॉरेन ऑब्जेक्ट मानकर उसे और उससे जुड़ी कोशिकाओं को रिजेक्ट कर सकता है जिससे पूरी प्रक्रिया खराब हो सकती है या अंग को निकालना पड़ सकता है।ऐसी स्थिति में मरीज की मौत भी ही सकती है।
फ्रांस में किडनी के 1216 मरीजों पर शोध
फ्रांस में किडनी प्रत्यारोपण वाले 1216 मरीजों पर शोध किया गया है। इसमें से 66 मरीजों यानि पांच फीसदी में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। जनसंख्या केआधार पर मरने वालों की मरीजों की दर एक फीसदी थी। जबकि गुर्दा प्रत्योरोपण वाले मरीजों में मृत्युदर 24 फीसदी थी। वैज्ञानिकों का मानना है,कम इम्यूनिटी के कारण गुर्दा प्रत्यारोपण वाले मरीजों की मौत अधिक हुई।
ये दवाएं प्रत्योरोपित अंग को स्वस्थ रखती हैं
डॉ. ईश्वर बताते हैं कि इम्युनोसप्रेशन दवाओं का काम सिर्फ इम्युनिटी नियंत्रित करना ही नहीं प्रत्यारोपित अंग को भी सुरक्षित और शरीर को संक्रमण से बचाने का भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई डोज की दवाएं कुछ मामलों, खासकर कोरोना महामारी में घातक हो सकता है।