सार
भारत में मेडिकल टूरिज्म बाजार हर साल 12.3% की दर से बढ़ रहा है, जिससे देश वैश्विक स्तर पर एक चिकित्सा हब बनने की दिशा में अग्रसर है। विश्वस्तरीय इलाज, सस्ता खर्च और कुशल डॉक्टरों के कारण विदेशी मरीज बड़ी संख्या में भारत आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी प्रोत्साहन और बेहतर नीति समर्थन से भारत को वैश्विक चिकित्सा केंद्र बनाना संभव है।
भारत को 2035 तक वैश्विक चिकित्सा केंद्र बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों के लिए कर छूट देने और स्वास्थ्य क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने की जरूरत है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2025 के 18.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 58.2 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। यह बाजार सालाना 12.3 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रहा है।
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) एवं केपीएमजी की रिपोर्ट में दूतावासों, प्रदर्शनियों और डिजिटल मंचों का लाभ उठाकर वैश्विक ब्रांडिंग अभियान के साथ राष्ट्रीय-राज्य स्तर पर हील इन इंडिया मिशन शुरू करने की सिफारिश की गई है।
फेडरेशन के अध्यक्ष के श्यामा राजू ने कहा, हील इन इंडिया केवल एक स्वास्थ्य पहल नहीं, बल्कि भारत की ब्रांडिंग का अवसर है। हम इस पहल को देखभाल के साथ संस्कृति, सुविधा के साथ विश्वसनीयता को जोड़ने का मौका मानते हैं। निवेश जुटाने और सेवा वितरण में सुधार के लिए भारत को राजकोषीय एवं गैर-राजकोषीय प्रोत्साहनों का मिश्रण प्रदान करना चाहिए।
स्टार्टअप व संगठनों को दी जाए सब्सिडी
रिपोर्ट में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, चिकित्सा अनुसंधान और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों में काम करने वाले स्टार्टअप्स एवं संगठनों के लिए लक्षित सब्सिडी और अनुदान देने की सिफारिश की गई है, जो सीधे मेडिकल टूरिज्म का समर्थन करते हैं। विशेष रूप से यह सिफारिश की गई है कि विदेशी बीमा कंपनियों की मदद से भारतीय अस्पतालों को अपने कवरेज नेटवर्क में शामिल कर बीमा पोर्टेबिलिटी को सक्षम किया जाए। इससे विदेशी मरीजों के लिए वित्तीय बाधाएं कम हो सकती हैं।
वीजा और बीमा संपर्क में कम हो अंतर
रिपोर्ट में वीजा और बीमा संपर्क में अंतर को दूर करने, सुविधा प्रदाताओं को प्रशिक्षण देकर क्षमता निर्माण मजबूत करने का सुझाव दिया गया है। भारत मेडिकल टूरिज्म सूचकांक में 10वें स्थान पर काबिज है।