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Kerala: पांच साल तक पेट में रहा सर्जिकल औजार, स्वास्थ्य मंत्री ने जांच और निलंबन की कार्रवाई के दिए आदेश

Fri, 20 Feb 2026 10:43 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

केरल के अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में 2021 की सर्जरी के पांच साल बाद महिला के पेट में आर्टरी फोर्सेप्स मिलने का मामला सामने आया है। परिवार ने निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराने का फैसला किया है और पुलिस में शिकायत की तैयारी है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने जांच के आदेश दिए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन की बात कही है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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केरल के अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुन्नप्रा की रहने वाली उषा जोसेफ के पेट में सर्जरी के पांच साल बाद एक सर्जिकल औजार मिला है। एक्स-रे में आर्टरी फोर्सेप्स दिखने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा है कि मामले में सख्त कार्रवाई होगी।
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सर्जरी कब हुई और दर्द क्यों बना रहा?
परिवार के मुताबिक उषा जोसेफ ने मई 2021 में वंदनम स्थित अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में गर्भाशय में फाइब्रॉयड हटाने की सर्जरी कराई थी। सर्जरी के बाद उन्हें लगातार पेट दर्द रहता था। उनके बेटे शिबिन ने बताया कि वे कई बार उसी अस्पताल गए, लेकिन दर्द की वजह नहीं बताई गई। हाल ही में किडनी स्टोन के शक में कराए गए एक्स-रे में आर्टरी फोर्सेप्स दिखा।

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अब इलाज कहां हो रहा है?
परिवार ने मेडिकल कॉलेज की बजाय कोच्चि के एक निजी अस्पताल में इलाज कराने का फैसला किया। शिबिन ने कहा कि डॉक्टर पहले स्कैन कर औजार की सही जगह पता करेंगे और फिर जल्द सर्जरी करेंगे। परिवार ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मुआवजे से इनकार किया। अब अंबलापुझा थाने में शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है।

रिटायर्ड सर्जन ने क्या कहा?
डॉ. ललितांबिका, जिन पर आरोप लगे हैं, ने कहा कि उन्होंने सर्जरी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि वह रिटायरमेंट के समय बड़े मामलों में शामिल नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि एक्स-रे में दिखा औजार छोटा ‘मॉस्किटो फोर्सेप्स’ है, कैंची नहीं। उनके अनुसार यह सिस्टम फेल्योर हो सकता है और पहले की किसी सर्जरी से भी यह रह गया हो सकता है।

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स्वास्थ्य मंत्री की सख्त प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन को सौंपी गई है। जो अधिकारी अभी सेवा में हैं, उन्हें निलंबित किया जाएगा। कोट्टायम और तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टरों की विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई होगी और पुलिस को भी जानकारी दी जाएगी।

सिस्टम फेल्योर या नियमों का उल्लंघन?
मंत्री ने सिस्टम फेल्योर के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सभी अस्पताल डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन का पालन करते हैं। बिना स्क्रब नर्स के सर्जरी होना ही नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने 2017 की समान घटना का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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