सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस बात के संकेत दिए कि इस वर्ष राज्यों को अपने यहां मेडिकल और डेंटल कोर्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की इजाजत मिली सकती है, बशर्ते केंद्र सरकार भी समर्थन करें। सरकार ने केंद्र सरकार को सोमवार तक अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है। उधर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने भी एनईईटी के विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि एनईईटी-1 में शामिल हो चुके छात्रों को एनईईटी-2 में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार को राज्यों से बैठक कर 9 मई तक अपना पक्ष रखने का वक्त दिया है। इससे पहले सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) केअस्तित्व में आने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति को लेकर सप्ताह के अंत में राज्यों के मंत्रियों से बैठक प्रस्तावित है। मामले की अगली सुनवाई 10 मई को होगी।
पीठ ने एक बार फिर साफ किया कि निजी मेडिकल कॉलेजों को अपनी प्रवेश परीक्षा लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पीठ ने कहा कि जहां तक राज्यों की परीक्षाओं का प्रश्न है कि यह केंद्र सरकार केनिर्णय पर निर्भर है। अदालत की इस टिप्पणी से उन राज्यों को उम्मीद की किरणें दिख रही हैं जो एकल प्रवेश परीक्षा का विरोध कर रहे हैं। कई राज्य यह कहते हुए एनईईटी का विरोध कर रहे हैं कि उनके छात्र एनईईटी की परीक्षा देने की स्थिति में नहीं है। कई राज्यों का कहना है कि क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा नहीं होने के कारण उनके छात्रों को बहुत परेशानी होगी। वहीं जम्मू एवं कश्मीर, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का कहना है कि उन्हें अपने राज्यों में प्रवेश परीक्षा कराने का अधिकार मिला हुआ है। ये राज्य कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दे रहे हैं।
एनईईटी-1 में अनुपस्थित रहे 40 हजार छात्र ले सकेंगे हिस्सा
मेडिकल स्टूडेंटस को मिली सौगात
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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पेश वकील विकास सिंह ने कहा कि गत 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले केे बाद एनईईटी केअस्तित्व में आने केबाद उत्पन्न भ्रम की स्थिति को देखते हुए राज्यों को इस वर्ष उन्हें अपने सरकारी कॉलेजों में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की इजाजत दी जा सकती है। हालांकि ,उन्होंने कहा कि निजी कॉलेजों और भाषायी अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जाने वाले कॉलेजों को अपनी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। एमसीआई ने कहा कि जो छात्र 1 मई को आयोजित एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं उन्हें 24 जुलाई को होने वाली एनईईटी-दो परीक्षा में शामिल होने की इजाजत नहीं दी सकती।
सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि एनईईटी-एक में साढ़े छह लाख अभ्यर्थियों में से करीब 40 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे। ऐसे छात्रों को 24 जुलाई को होने वाली एनईईटी-दो में शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है लेकिन सभी अभ्यर्थियों को एनईईटी-दो परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने भी सुप्रीम कोर्ट की याचिका दाखिल कर एनईईटी का विरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि उसके अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लिहाजा उन्हें एनईईटी से छूट दी जाए।