केंद्र और उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के बीच शांति वार्ता के लिए 1991 से ही मध्यस्थकार की भूमिका निभा रहे रेबती फूकन 22 अप्रैल से अचानक लापता हो गए हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी गई। उनके बेटे कौशिक फूकन ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है।
रेबती फूकन के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की
इसमें उल्फा चीफ परेश बरुआ के उस बयान का हवाला दिया गया है जिसके अनुसार, फूकन आईबी, रॉ या राष्ट्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में हो सकते हैं। इस याचिका में असम सरकार सहित अन्य प्राधिकारों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि फूकन को अदालत के सामने पेश किया जाए। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एम शांतानगौदर की पीठ के सामने इस याचिका का उल्लेख किया गया।
पीठ पहली जून को इस मामले पर सुनवाई करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने कौशिक फूकन की ओर से पीठ के समक्ष कहा कि रेबती केंद्र और उल्फा के बीच शांति वार्ता के मध्यस्थकार हैं। याचिका में इस मामले को सीबीआई अथवा किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी अथवा एसआईटी को ट्रांसफर करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सुस्त रवैये के चलते उनका स्थानीय पुलिस से भरोसा उठ गया है।