खेल जगत में यौन शोषण व लैंगिक भेदभाव के मामलों का शीघ्र निस्तारण होना चाहिए और इसके लिए मध्यस्थता की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके सीकरी ने मंगलवार को यह टिप्पणी की है।
पूर्व जज ने कहा, कोरोना लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन विवाद समाधान कानून व्यवस्था के अगले चरण के रूप में सामने आया है। यह मुकदमेबाजी और मध्यस्थता का माध्यम बना है।
उन्होंने कहा, खेल जगत के वाणिज्यीकरण ने कई तरह के विवादों को जन्म दिया है। सीकरी सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य अदालत में जज हैं। एक वेबिनार के दौरान उन्होंने कहा, कई विवाद लैंगिक भेदभाव ओर यौन शोषण के होते हैं। इनमें अदालतों या मुकदमेबाजी के बजाय मध्यस्थता से निस्तारण जरूरी है।
उन्होंने कहा, ज्यादातर मामलों में कोच द्वारा यौन शोषण किया जाता है। इन मामलों का तत्काल निस्तारण किया जाना चाहिए। कई बार कुछ दिनों का भी इंतजार नहीं किया जा सकता। ऐसे में मुकदमेबाजी के बजाय मध्यस्थता का रास्ता काफी बेहतर है। इसीलिए खेल समितियां आजकर एड हॉक जज और मध्यस्थों की व्यवस्था करने लगी हैं। ताकि इन मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया जा सके।