देश में टीकाकरण अभियान को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि सामूहिक खसरा टीकाकरण अभियान ने भारत में हजारों बच्चों की जान बचाई है। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत में खसरे को खत्म किया जा सकता है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बच्चों में उच्च मृत्यु दर को कम करने और उच्च प्रतिरक्षा दर को बनाए रखने के लिए निरंतर परिश्रम की आवश्यकता होगी। कुछ लोगों ने टीके को लेकर बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण दिखाई देने के आरोप भी लगाए थे। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन टीकों का ऑटिज्म से कोई संबंध नहीं है।
इस रिसर्च में टीकाकरण का दिख रहा परिणाम विश्व में खसरा के उन्मूलन के लिए चल रहे प्रयासों को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकते हैं। पिछले 30 वर्षों में खसरे से होने वाली मौतों की संख्या में काफी कमी आई है। हालांकि संक्रमण विश्व स्तर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर का एक महत्वपूर्ण कारण है। संक्रमण से होने वाली मौतों का बड़ा हिस्सा अफ्रीका और एशिया में होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि भारत में जिन राज्यों में अभियान चलाया गया उनमें गैर-अभियान वाले राज्यों की तुलना में एक महीने से 56 महीने तक के बच्चों की मृत्युदर में कमी आई।
सरकार ने 2010 में भारत राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के साथ की दूसरी खुराक को लागू किया था। यह अभियान उन जिलों में शुरू किया गया जहां बच्चों में टीकाकरण की दर कम थी। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में खसरे से शिशु मृत्यु के मामलों में कमी आई है, लेकिन इस अध्ययन से पहले यह नहीं पता था कि क्या राष्ट्रीय खसरा अभियान से शिशु मृत्युदर में भी कमी आई है।
1960 के दशक में हुआ था खसरे के टीके का निर्माण
खसरे के टीके का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था। जिसके बाद दुनिया भर से खसरे का उन्मूलन करने के लिए कई वैश्विक संस्थाओं ने टीकाकरण कार्यक्रम भी चलाया। इनमें अमेरिकन रेड क्रॉस, विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन, यूनिसेफ शामिल हैं।
यूएन के 183 देशों में लगभग 2 लाख 25 हजार मामले आए सामने
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार साल 2018 में 183 सदस्य देशों में खसरे के लगभग सवा दो लाख से ज्यादा मामले सामने आए। हालांकि यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। क्योंकि, अब तक कई देशों ने डब्लूएचओ को अपने देशों का डेटा नहीं सौंपा है।
खसरा बेहद संक्रामक बीमारी
खसरे का वायरस छींकने या खांसने से हवा में लार या बलगम के द्वारा फैलता है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के पास खड़े होने से भी फैल सकता है। संक्रमण के बाद मरीज को खांसी और बुखार आता है। इसके साथ ही शरीर पर लाल धब्बे होने शुरू होते हैं।