विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान में तीन भारतीय नागरिक लापता हैं और भारत ने इस मुद्दे को तेहरान के सामने गंभीरता से उठाया है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा तथा आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण पर मिलकर काम कर रहे हैं।
प्रवक्ता ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के कुछ भागो में चल रहे संघर्ष पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डीआरसी में करीब 25,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें से लगभग 1,000 संघर्ष प्रभावित शहर गोमा में हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं। हमारे दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी की है और हेल्पलाइन नंबर भी दिए हैं ताकि अगर किसी को कोई परेशानी हो तो वो तुरंत उनसे संपर्क कर सकें।
भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी पर श्रीलंका से दर्ज कराया कड़ा विरोध
जायसवाल ने कहा कि भारत ने हाल ही में भारतीय मछुआरों को हिरासत में लेने और उन पर गोली चलाने की घटना पर श्रीलंका से कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कराईकल के दो भारतीय मछुआरे श्रीलंकाई नौसेना की जाफना सागर में की गई गोलीबारी में घायल हो गए थे। इसके बाद भारत ने श्रीलंकाई नौसेना की गोलीबारी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना पर विरोध दर्ज कराने के लिए दिल्ली में श्रीलंका के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब किया था।
ब्रिटेन में बढ़ते चरमपंथी खतरे पर भी बोलेप्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ब्रिटेन में बढ़ते चरमपंथी खतरे और अलगाववाद मसले पर कुछ रिपोर्ट देखी हैं। वहां पर अलगाववादी और चरमपंथी खतरे की प्रकृति सर्वविदित है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और गलत तरीके से इसकी तुलना नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी ब्रिटेन में बढ़ते चरमपंथ पर वहां के गृह कार्यालय की रिपोर्ट को लेकर कही। ब्रिटेन की मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश में बढ़ते चरमपंथ के संबंध में ‘हिंदू राष्ट्रवाद’, ‘इस्लामी चरमपंथ’ और ‘खालिस्तानी चरमपंथ’ का उल्लेख किया गया है।
कनाडा के सामने 26 प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित
वहीं कनाडा में आतंकियों के लंबित प्रत्यर्पण पर उन्होंने कहा कि करीब 26 प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित हैं। पिछले एक दशक में भारत के प्रत्यर्पण और अनंतिम गिरफ्तारी के कई अनुरोध भेजे जाने के बावजूद लंबित हैं। पिछले साल, विदेश मंत्रालय ने कनाडा को अपराधियों और भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए समन किया था। इस संदर्भ में उन्होंने गुरजीत सिंह, गुरजिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, लखबीर सिंह लांडा और अर्शदीप सिंह गिल का नाम लिया।
पीएम मोदी ने एआई शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति का निमंत्रण स्वीकार किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी पुष्टि की।
मीडिया से बातचीत में जायसवाल ने कहा कि भारत भी अपना स्वयं का एआई कार्यक्रम विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा, फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्शन समिट के लिए आमंत्रित किया है और हमने उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। हम आपको आगे की जानकारी के बारे में अपडेट करेंगे। 10-11 फरवरी को फ्रांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक्शन समिट की मेजबानी करेगा। ग्रैंड एलिसी पैलेस में आयोजित इस सम्मेलन में राज्य और सरकार के प्रमुख, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेता, छोटी और बड़ी कंपनियों के सीईओ, शिक्षाविदों के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठन, कलाकार और नागरिक समाज के सदस्य शामिल होंगे। जायसवाल ने यह भी कहा कि चीनी स्टार्टअप डीपसीक ने दुनिया को चौंका दिया है। हमारे पास अपना खुद का प्रोग्राम है और हम इसे और विकसित करना चाहते हैं और इस संबंध में हम अपने कई भागीदारों के संपर्क में हैं, जिनके साथ हम प्रौद्योगिकी मुद्दों पर प्रौद्योगिकी सहयोग करते हैं और हम उन्हें और मजबूत करना चाहते हैं।