विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत की नजर दोनों देशों के संघर्ष पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा अगर हिंसा शांत नहीं हुई तो हम आगे संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। वहीं फरजाद- बी गैस क्षेत्र परियोजना से बाहर होने पर उन्होंने कहा कि ईरान से बातचीत जारी है जल्द कोई न कोई हल निकलेगा।
इस्राइली सेना और फिलिस्तीनियों के बीच आज लगातार 10 दिनों से खूनी संघर्ष जारी है। इस्राइल ने गुरुवार तड़के गाजा पट्टी पर कई हवाई हमले किए जिसमें कम से कम एक फिलिस्तीन का नागरिक मारा गया और कई अन्य घायल हो गए। वहीं इन दोनों देशों के बीच जारी युद्ध पर भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत की नजर दोनों देशों की गतिविधियों पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा अगर हिंसा शांत नहीं हुई तो हम आगे संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। वहीं गैस फील्ड समझौते में ईरान के हाथ खींचने को लेकर उन्होंने कहा कि अभी दोनों देशों से बातचीत जारी है और हम वहां के अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं।
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बता दें कि ईरान सरकार के एक स्थानीय कंपनी के पक्ष में निर्णय करने से भारत फारस की खाड़ी में फरजाद- बी गैस क्षेत्र परियोजना से बाहर हो गया है। इस गैस-फील्ड की खोज भारतीय कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने की थी। ईरान ने इस गैस क्षेत्र को विकसित करने का काम सोमवार को एक स्थानीय कंपनी को दे दिया।
ईरान के पेट्रोलियम मंत्रालय की आधिकारिक समाचार सेवा शाना ने सोमवार को एक रिपोर्ट में कहा कि दि नेशनल ईरानियन आयल कंपनी (एनआईओसी) ने फारस की खाड़ी की फरजाद-बी गैस फील्ड के विकास के लिये पेट्रोपार्स ग्रुप के साथ 1.78 अरब डालर का करार किया। एजेंसी के मुताबिक समझौते पर तेहरान में सोमवार 17 मई को हस्ताक्षर किये गए थे। इस मौके पर ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजान जांगनेह भी उपस्थित थे।
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इस्राइल हुआ आक्रामक
उधर इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच गत 10 दिन से जारी भीषण लड़ाई के मद्देनजर “तनाव में महत्वपूर्ण कमी” लाने की अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की अपील के बावजूद नेतन्याहू ने गाजा पट्टी पर सैन्य अभियान जारी रखने का बुधवार को संकल्प लिया। यह गत हफ्ते लड़ाई शुरू होने के बाद से दो करीबी सहयोगी देशों के बीच सार्वजनिक दरार की पहली घटना है। नेतन्याहू के इस बयान से युद्धविराम पर पहुंचने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास जटिल हो सकते हैं।
नेतन्याहू ने सैन्य मुख्यालय के दौरे के बाद कहा कि वह ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति के सहयोग की बहुत सराहना करते हैं’’, लेकिन ‘‘इजराइल के लोगों को शांति एवं सुरक्षा वापस दिलाने के लिए’’ देश अभियान जारी रखेगा।