इस्राइली रीडआउट के बाद बागची ने इस सवाल के जवाब में बताया कि हमने जो संसद में कहा था, उस पर हम कायम हैं। बता दें, 14 दिसंबर को सदन में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने बताया था कि सरकार ने फलस्तीनी मजदूरों की जगह इस्राइल में भारतीय श्रमिकों के काम करने की कोई चर्चा नहीं की है।
भारत और इस्राइल के बीच भारतीय श्रमिकों के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। यह कहना है कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची का। बता दें, एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर बातचीत की थी। इसके बाद इस्राइली रीडआउट में कहा गया कि भारत से इस्राइल में विदेशी श्रमिकों के आगमन पर बात हुई।
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भारतीय नागरिक विदेश में काम करने के लिए स्वतंत्र
इस्राइली रीडआउट के बाद बागची ने इस सवाल के जवाब में बताया कि हमने जो संसद में कहा था, उस पर हम कायम हैं। बता दें, 14 दिसंबर को सदन में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने बताया था कि सरकार ने फलस्तीनी मजदूरों की जगह इस्राइल में भारतीय श्रमिकों के काम करने की कोई चर्चा नहीं की है। हालांकि, बागची ने कहा कि भारतीय नागरिक रोजगार के लिए विदेश जाने के लिए स्वतंत्र हैं फिर चाहे वह इस्राइल जाएं या किसी और देश। भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में पहले से ही काम कर रहे हैं। वहां के स्वास्थ्य विभाग में तो अधिकतर भारतीय ही हैं।
कतर मुद्दे पर भी दिया जवाब
वहीं, कतर में पूर्व आठ भारतीय नौसेना कर्मियों के फांसी के सवाल पर बागची ने कहा कि मामला वहां की अपील अदालत में हैं। अब तक तीन सुनवाई हो चुकी है। सुनवाई में क्या हुआ नई दिल्ली को अधिक जानकारी नहीं है। शाही क्षमा सूची में कितने भारतीयों के नाम हैं, इसकी औपचारिक जानकारी नहीं मिली है।
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बंधकों की रिहाई पर भी हुई चर्चा
नेतन्याहू से चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने बातचीत और कूटनीतिक तरीके से बंधकों की रिहाई और प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता जारी रखने पर जोर दिया था। उन्होंने जंग को लेकर जल्दी से जल्द और शांतिपूर्ण समाधान पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बात की और उन्हें इस्राइल-हमास संघर्ष में हाल के घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी। दोनों नेताओं ने संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।