विदेश मंत्रालय ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक पर मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका और कनाडा) नागराज नायडू काकनूर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में हाल के समय में आई बाधाओं को देखते हुए क्वाड ने 'हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पहल' शुरू की है।
उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद क्वाड के सदस्य देशों के पास मौजूद अलग-अलग संसाधनों और क्षमताओं का मिलकर इस्तेमाल करना है। इसके तहत एक ऐसी रणनीति बनाई जाएगी, जो तकनीक, प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय बाजार के विश्लेषण और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने पर फोकस करेगी।
नायडू ने कहा कि बैठक में आर्थिक सुरक्षा और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर खास चर्चा हुई। क्वाड ने 'क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क' की घोषणा की है, जिसका मकसद खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) और निवेश जैसे क्षेत्रों में विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। इसका मकसद सरकारी और निजी क्षेत्र की मदद से सहयोग बढ़ाना है, ताकि आधुनिक उद्योगों और नई तकनीकों के लिए जरूरी आपूर्ति प्रणाली सुरक्षित और मजबूत बन सके। मंत्रियों ने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, बिना बाधा व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पर भी जोर दिया।
पहलगाम में आतंकी हमले की निंदा
उन्होंने कहा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग क्वाड का एक अहम हिस्सा है। मंत्रियों ने सभी प्रकार के आतंकवाद, खासकर सीमा पार आतंकवाद की सख्त निंदा की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान में अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की गई। यह दोहराया गया कि आतंकवादी संगठनों और उनका वित्तपोषण करने वालों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
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समुद्री संपर्क मजबूत करने पर जोर
नायडू ने कहा कि मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और मजबूत समुद्री संपर्कों की अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि क्वाड ने आईपीएमडीए (इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस) के तहत सहयोग को आगे बढ़ाया है, ताकि पूरे क्षेत्र की समुद्री गतिविधियों की एक साझा और स्पष्ट तस्वीर तैयार की जा सके।
समुद्री निगरानी के लिए होगा बेहतर तालमेल
उन्होंने यह भी कहा कि आज क्वाड ने 'इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन' शुरू किया है, जिसका मकसद समुद्री निगरानी में बेहतर तालमेल करना है। यह नई पहल आधुनिक तकनीकों की मदद से काम करेगी, जिससे रियल-टाइम जानकारी साझा की जा सकेगी और जहाजों की स्थिति की अधिक स्पष्ट और सटीक जानकारी मिल सकेगी।