तमिलनाडु की सरकार ने श्रीलंका की मदद के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था और केंद्र से इस पर विचार करने की अपील की थी। अब विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तमिलनाडु सरकार का सहयोग केंद्र की ओर से श्रीलंका को उपलब्ध कराई जा रही मदद में पूरक हो सकता है।
अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका को भारत सरकार की ओर से लगातार मदद उपलब्ध कराई जा रही है। तमिलनाडु की सरकार ने भी श्रीलंकाई सरकार को सहायता की पेशकश की है। इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि तमिलनाडु की सरकार की सहायता उस मदद को पूरा कर सकती है जो भारत सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही है। मंत्रालय ने कहा कि श्रीलंका की सरकार की प्राथमिकता समावेशी वितरण है।
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मंत्रालय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से कहा है कि श्रीलंका सरकार को मानवीय राहत सामग्री की आपूर्ति करने और वितरण करने के लिए आप प्रदेश के मुख्य सचिव को भारत सरकार के साथ समन्वय करने का निर्देश दे सकते हैं। मंत्रालय ने आगे कहा कि संकटग्रस्त देश में उचित वितरण के लिए राहत सामग्री श्रीलंका की सरकार को प्रदान की जाएगी।
बीते शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें संकट से जूझ रहे श्रीलंका को तत्काल भोजन सामग्री और जीवन रक्षक दवाइयां भेजने के लिए राज्य सरकार की ओर से किए गए अनुरोध पर केंद्र से गौर करने की अपील की गई थी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव को विपक्षी अन्नाद्रमुक और भाजपा ने भी समर्थन दिया था। स्टालिन ने कहा था कि हम श्रीलंका में स्थितियौे को पड़ोसी देश का आंतरिक मामला कह कर नहीं छोड़ सकते।
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अप्रैल में 30 फीसदी के करीब पहुंची मुद्रास्फीति
खाद्य उत्पादों के दाम बढ़ने से श्रीलंका की कुल मुद्रास्फीति अप्रैल में लगभग 30 फीसदी पर पहुंच गई जबकि मार्च में यह 18.7 फीसदी रही थी। श्रीलंका के जनगणना एवं सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देश की कुल मुद्रास्फीति पिछले महीने 29.8 फीसदी रही। एक महीने में ही मुद्रास्फीति में तेज उछाल आया है। मार्च में यह दर 18.7 फीसदी रही थी।नकदी संकट से यहां जरूरी खाद्य उत्पादों की आपूर्ति भी ठीक से नहीं हो पा रही है जिससे उनकी कीमतें बहुत बढ़ गई हैं।