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MEA: थाईलैंड में हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिक, मंत्रालय ने बताया सत्यापन का काम जारी; जानें पूरा मामला

Wed, 29 Oct 2025 06:01 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

थाईलैंड में म्यांमार से सीमा पार कर पहुंचे कई भारतीय नागरिकों को स्थानीय अधिकारियों ने हिरासत में लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि बैंकॉक स्थित भारतीय मिशन थाई अधिकारियों के साथ मिलकर उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि कर रहा है।
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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत सरकार ने थाईलैंड में हिरासत में लिए गए भारतीय नागरिकों की जल्द वापसी की प्रक्रिया तेज कर दी है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर इन नागरिकों की पहचान की पुष्टि और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। इन लोगों को पिछले कुछ दिनों में म्यांमार से सीमा पार कर थाईलैंड पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हम थाई अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि सभी भारतीय नागरिकों की जल्द से जल्द स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही प्रत्यर्पण संभव होगा। इस बीच, थाईलैंड में भारतीय राजदूत नागेश सिंह ने रॉयल थाई पुलिस के इमीग्रेशन ब्यूरो के आयुक्त पोल. लेफ्टिनेंट जनरल पनुमास बून्यालुग से मुलाकात कर भारतीयों की शीघ्र वापसी पर चर्चा की।

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म्यांमार से पलायन की पृष्ठभूमि
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में म्यांमार के दक्षिणपूर्वी हिस्से में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण लगभग 500 भारतीय नागरिक वहां से भागकर थाईलैंड पहुंचे। ये लोग मुख्य रूप से म्यावाडी के स्कैम सेंटर्स से भागे थे, जहां इन्हें फर्जी नौकरी के झांसे में बुलाकर साइबर अपराध और ठगी जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल किया गया था।

भारत सरकार का प्रयास जारी
भारत सरकार लंबे समय से दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों विशेष रूप से म्यांमार, लाओस और कंबोडिया में फंसे भारतीयों को छुड़ाने और वतन लाने के लिए प्रयासरत है। विदेश मंत्रालय ने पहले भी बताया था कि इन केंद्रों में कई भारतीयों को जबरन काम करवाया गया और उनके पासपोर्ट तक छीन लिए गए। दर्जनों भारतीय नागरिकों को पहले भी म्यावाडी क्षेत्र से मे सॉट (थाई-म्यांमार सीमा) के जरिए भारत वापस लाया जा चुका है।

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प्रधानमंत्री मोदी की पहल
इस साल अप्रैल में बैंकॉक में हुए बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के प्रधानमंत्री और स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन काउंसिल के चेयरमैन वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात में इस मुद्दे को उठाया था। मोदी ने म्यांमार सरकार द्वारा भारतीयों की रिहाई और सहयोग के लिए आभार जताया था। दोनों देशों ने सीमा पार अपराध, मानव तस्करी और विद्रोही गतिविधियों पर संयुक्त रूप से काम करने पर सहमति जताई थी।

मामले में क्या बोले थाई प्रधानमंत्री?
भारत म्यांमार के एक साइबर स्कैम सेंटर से सैन्य छापे के दौरान भागकर थाईलैंड पहुंचे करीब 500 भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस लाएगा। इसके लिए भारत सरकार वहां एक विमान भेजने की योजना बना रही है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल बुधवार को यह जानकारी दी।

अनुतिन ने कहा कि भारत ने थाईलैंड से सहयोग मांगा है, वे नहीं चाहते कि ये भारतीय नागरिक हम पर बोझ बने। वे इन पीड़ितों को लेने के लिए एक विमान भेजेंगे। विमान सीधे माई सोत में उतरेगा। यह पहली बार नहीं है जब भारत ने ऐसा कदम उठाया है। इस साल की शुरुआत में भी भारत ने अपने नागरिकों को बचाने के लिए एक विमान भेजा था, जब थाई-म्यांमार सीमा पर चल रहे साइबर घोटाला केंद्रों पर क्षेत्रीय अभियान के दौरान कई भारतीयों को मुक्त कराया गया था।

दरअसल, म्यांमार की सेना ने बीते हफ्ते केके पार्क साइबर अपराध परिसर के खिलाफ कई सैन्य अभियान चलाए थे। इस कार्रवाई के बाद वहां काम कर रहे सैकड़ों विदेशी कर्मचारी भागकर थाईलैंड के सीमावर्ती शहर माई सोत चले गए थे। स्थानीय थाई अधिकारियों के मुताबिक, 28 देशों के 1,500 से अधिक लोग इन कैंपों से भागकर थाईलैंड में शरण लिए हुए हैं। यहां उनकी देखभाल की जा रही है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर धोखाधड़ी का हब है म्यांमार का केके पार्क
म्यांमार में केके पार्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर धोखाधड़ी करने लिए बदनाम है। अंतरराष्ट्रीय साइबर घोटालों की वजह से इस पर लंबे वक्त से अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां और राजनयिकों ने कड़ी निगरानी में रखा है। यह विशाल परिसर और इसके आसपास के इलाके चीनी आपराधिक गिरोहों से संचालित हैं।

यह म्यांमार की सेना से जुड़े मिलिशिया यानी स्थानीय सशस्त्र समूहों से संरक्षित हैं। कोविड-19 महामारी के बाद से थाईलैंड, म्यांमार, लाओस और कंबोडिया के सीमावर्ती क्षेत्रों में ऑनलाइन धोखाधड़ी का बड़ा नेटवर्क फैल गया है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इन परिसरों में काम करने के लिए मजबूर किए गए सैकड़ों हजारों लोगों की तस्करी से अरबों डॉलर कमाए गए हैं।

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