विदेश मंत्रालय ने अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा पर लगाई गई हालिया पाबंदियों पर बयान जारी किया है। मंत्रालय ने बताया कि सभी संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही चेतावनी दी कि इस कदम के मानवीय परिणाम हो सकते हैं और यह कई परिवारों के जीवन में व्यवधान पैदा कर सकता है। विदेश मंत्रालय अपने बयान में यह स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर गंभीर रूप से विचार किया जा रहा है और किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों की राय को शामिल किया जाएगा।
मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के उद्योग नवाचार और रचनात्मकता में जुड़े हैं और उन्हें उम्मीद है कि दोनों देश मिलकर इस मुद्दे पर सबसे उपयुक्त रास्ता खोजेंगे। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारतीय उद्योग और अमेरिकी साझेदार इस पर परामर्श कर सकते हैं ताकि पेशेवरों और परिवारों पर न्यूनतम असर पड़े।
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कब से नियम लागू?
यह नियम 21 सितंबर से लागू होगा और इसके लिए केवल एक दिन की समयसीमा दी गई है। भारतीय आईटी उद्योग संगठन नैसकॉम ने कहा कि इतनी कम समयसीमा कंपनियों, पेशेवरों और छात्रों के लिए भारी अनिश्चितता खड़ी कर रही है। ऑनशोर प्रोजेक्ट्स पर भी इसका असर दिखाई देगा।
भारतीय आईटी कंपनियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। लंबे समय से अमेरिकी कंपनियों के साथ काम करने वाली कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित होगी। नैसकॉम ने बताया कि हाल के वर्षों में कंपनियों ने एच-1बी पर निर्भरता कम कर स्थानीय भर्तियों को बढ़ावा दिया है।
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आईटी सेक्टर पर दोहरा दबाव
नैसकॉम के मुताबिक आईटी सेक्टर पर दोहरा दबाव है। भारतीय प्रोफेशनल्स एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। वित्त वर्ष 2025 तक अमेजन, टीसीएस, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और एप्पल को सबसे ज्यादा वीजा मिले। इस समय में भारतीय आईटी सेक्टर पहले से अस्थिर कारोबारी माहौल और भू-राजनीतिक तनाव से जूझ रहा है।
नई वीजा फीस बढ़ोतरी ने चिंताएं और गहरा दी हैं। भारतीय कंपनियां एच-1बी पर निर्भरता कम कर रही हैं और अमेरिका में स्थानीय भर्तियों को बढ़ावा दे रही हैं। कंपनियां टैक्स का पालन कर रही हैं और स्थानीय रोजगार भी पैदा कर रही हैं।
मौजूदा धारकों पर नहीं लगेगा एक लाख डॉलर का शुल्क
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएनआई से बात कर स्पष्ट किया है कि भारत आने या अमेरिका से लौटने वाले मौजूदा वीजाधारकों को किसी तरह की जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित एक लाख डॉलर शुल्क केवल नए H-1B वीजा आवेदकों पर लागू होगा, न कि मौजूदा धारकों पर।
ट्रंप के एच-1बी वीजा शुल्क फैसले पर बोले कर्नाटक मंत्री परमेश्वर
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा स्पॉन्सरशिप शुल्क को एक लाख डॉलर करने के आदेश पर कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि यह फैसला लोगों को अमेरिका जाने और काम करने से रोकने के लिए उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका ने भारत से आउटसोर्सिंग कम करने का निर्णय लिया था, लेकिन अब यह काम भारत में वापस आ सकता है क्योंकि देश के पास तकनीकी क्षेत्र में विशाल मानव संसाधन मौजूद है। उन्होंने इसे भारत के लिए एक अवसर भी बताया।