दिल्ली एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने विजयी भाषण में कहा कि वे दिल्ली को सुंदर बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद चाहते हैं। एमसीडी जीत के बाद अब महिलाओं और बच्चों को भी जिम्मेदारी मिलेगी। दूसरी ओर भाजपा ने इस चुनाव में वही चूक दोहरा दी, जो दिल्ली के दो विधानसभा चुनाव में देखने को मिली थी। तीसरी बार 'अकेले' केजरीवाल, मोदी-शाह की 'टोली' पर भारी पड़ गए। भाजपा के दिग्गज नेताओं ने इस चुनाव में पूरी ताकत लगा दी थी।
2015 के विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार में भाग लिया था। इसके बाद 2020 में पीएम मोदी आगे नहीं आए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रैलियां और रोड शो किए थे। एमसीडी चुनाव में मोदी और शाह, दोनों ही प्रत्यक्ष तौर पर वोटरों के बीच नहीं आए। चुनाव प्रचार के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि भाजपा के सात मुख्यमंत्री, एक डिप्टी सीएम और 17 से ज्यादा केंद्रीय मंत्री दिल्ली में प्रचार कर रहे हैं। मैं अकेला घूम रहा हूं। दिल्ली के लोग मुद्दों पर वोट करेंगे, सत्येंद्र जैन के वीडियो या केंद्रीय मंत्रियों की टोली को देखकर अपन मन नहीं बदलेंगे।
दो बड़ी हार से नहीं लिया कोई सबक
दिल्ली में 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कुल 67 सीटों पर जीत हासिल की थी। उस चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के तमाम दिग्गज प्रचार में उतरे थे। लगभग दो सौ नेता, जिनमें केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल थे, ने दिल्ली में चुनाव प्रचार किया था। उस वक्त भी अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली वाले मुद्दों पर मतदान करेंगे न कि सांसदों और मंत्रियों की भीड़ देखकर। इसके बाद 2020 का विधानसभा चुनाव हुआ। इसमें भी भाजपा ने वही चूक कर दी। केंद्रीय मंत्रियों की टोली को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंप दी।
नतीजा, दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा को केवल आठ सीटें मिली थी। इस चुनाव में अमित शाह ने प्रचार की कमान संभाली थी। उन्होंने कई जगहों पर रोड शो किया। पीएम मोदी, चुनाव प्रचार से दूर रहे थे।
सीबीआई और ईडी की कार्रवाई भी
अब एमसीडी चुनाव में भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव वाली रणनीति अपनाई। भाजपा के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाला। एक तरफ केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री, दिल्ली की गलियों में घूम रहे थे तो दूसरी ओर तिहाड़ जेल में बंद 'आप' के मंत्री सत्येंद्र जैन के वीडियो जारी हो रहे थे। चुनाव प्रचार के बीच ही दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को कथित शराब घोटाले में सीबीआई और ईडी की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
भाजपा के स्टार प्रचारक, जिनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकारी, मीनाक्षी लेखी, गजेन्द्र शेखावत, धर्मेंद्र प्रधान, स्मृति ईरानी, सर्बानंद सोनोवाल, जितेन्द्र सिंह, पीयूष गोयल, गिरिराज सिंह, अनुराग सिंह ठाकुर, मनोहर लाल खट्टर, पुष्कर सिंह धामी, जयराम ठाकुर, हिमंत बिस्वा सरमा और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य आदि शामिल हैं, प्रचार में उतरे। 'आप' इस चुनाव में सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कूड़े के पहाड़ और प्रदूषण आदि मुद्दों को उठाती रही। भाजपा ने शराब घोटाला और सत्येंद्र जैन के वायरल वीडियो को मुद्दा बनाया। ठगी के आरोप में जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर के लैटर बम भी खूब देखने को मिले।
फर्जी वीडियो पर भारी पड़ेगा 'आप' का विकास
- आप नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा, भाजपा के पास कोई मुद्दा ही नहीं है। दिल्ली वालों को महंगाई, प्रदूषण व कूड़े के पहाड़ से कैसे निजात मिलेगी। स्कूल और अस्पताल कैसे बनेंगे, भाजपा यह नहीं बता रही है। आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा था कि भाजपा के फर्जी वीडियो पर 'आप' का विकास भारी पड़ेगा। खुद केजरीवाल ने लोगों के बीच भाजपा को चुनौती दी थी कि एमसीडी में 15 साल शासन करने वाली भाजपा, कोई एक काम गिना दे, जो उसने कराया हो।
- केजरीवाल ने कहा कि एमसीडी में आने के बाद 'जनता चलाएगी एमसीडी' स्कीम लांच होगी। आरडब्लूए को मिनी पार्षद का दर्जा मिलेगा। दूसरी ओर असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एमसीडी चुनाव प्रचार में श्रद्धा मर्डर केस को उठा दिया। उन्होंने कहा कि देश में लव जिहाद के खिलाफ समान नागरिक संहिता लागू करने की जरुरत है। भाजपा को लगता था कि गुजरात विधानसभा चुनाव के साथ एमसीडी चुनाव में 'आप' फंस जाएगी। इसके अलावा एमसीडी के परिसीमन से भी भाजपा को फायदा पहुंचने की उम्मीद थी। परिसीमन के बाद दिल्ली में नगर निगम वार्डों की संख्या 272 से 250 हो गई थी। केंद्र ने तीनों नगर निगमों के एकीकरण का फैसला किया था।