फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MCD Election: बागी नेता बिगाड़ सकते हैं भाजपा के समीकरण, नाराज नेताओं ने बढ़ाई पार्टी की मुश्किल

Mon, 14 Nov 2022 01:11 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

MCD Election: दिल्ली में जैन समुदाय के भारी संख्या में वोटर रहते हैं। पूर्वी दिल्ली, मध्य दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली में काफी अधिक संख्या में रहने वाले जैन समाज भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं। लेकिन जैन समाज के लोगों का आरोप है कि इस बार भाजपा ने उनके समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया है...
विज्ञापन
MCD election 2022: BJP Councillors - फोटो : PTI (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD Election 2022) में बागी नेताओं ने भाजपा और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं की धडकनें बढ़ा दी हैं। कई सीटों पर नाराज नेताओं के कारण चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। जैन समुदाय, पहाड़ी समुदाय और पंजाबी समुदाय में अपने समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न देने की बात पर रोष गहरा गया है। इधर, एक तरफ तो टिकट पाए प्रत्याशी नामांकन में व्यस्त हैं, तो बागी नेता समुदाय की बैठकों में अपनी भावी रणनीति तय कर रहे हैं। बागियों ने दम दिखाया तो भाजपा को कई सीटों पर नुकसान हो सकता है।

पूर्वी दिल्ली की प्रीत विहार सीट को पंजाबी बहुल माना जाता है। यहां पंजाबी समुदाय के लोग काफी संख्या में रहते हैं। यहां अब तक कांग्रेस के गुरचरण सिंह राजू और रमेश पंडित को सफलता मिलती रही है, तो भाजपा उम्मीदवार बबिता खन्ना भी यहां से जीत हासिल करने में सफल रही हैं। भाजपा ने इस बार प्रीत विहार से रमेश गर्ग को मैदान में उतारा है। नामांकन के दिन ही उनका विरोध शुरू हो गया है। स्थानीय कार्यकर्ताओं से सहयोग न मिलने पर यहां भाजपा के चुनावी समीकरण बिगड़ सकते हैं।

जैन समुदाय में भी नाराजगी

दिल्ली में जैन समुदाय के भारी संख्या में वोटर रहते हैं। पूर्वी दिल्ली, मध्य दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली में काफी अधिक संख्या में रहने वाले जैन समाज भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं। लेकिन जैन समाज के लोगों का आरोप है कि इस बार भाजपा ने उनके समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया है। भाजपा ने इस बार वार्ड संख्या 72 से पिंकी जैन के रूप में एकमात्र जैन उम्मीदवार के रूप में उतारा है, जबकि इसके पहले काफी उम्मीदवारों को अवसर मिलता रहा था।

पार्टी के इस रुख से जैन समुदाय के लोगों में काफी नाराजगी है। प्रतिनिधित्व को लेकर जैन समुदाय की आंतरिक बैठक हो रही हैं, जिसमें समुदाय की भावी रणनीति को लेकर विचार किया जा रहा है। दिल्ली की राजनीति पर करीबी नजर रखने वालों का मानना है कि इससे भाजपा को नुकसान हो सकता है। यदि पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ी, तो इसका सीधा लाभ आम आदमी पार्टी को मिल सकता है।

भाजपा ने पूर्वी दिल्ली की सीट आनंद विहार से डॉ. मोनिका पंत को मैदान में उतारा है, जबकि आम आदमी पार्टी ने यहां से राहुल जैन को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने इस सीट से राजीव चौधरी को मैदान में उतारा है। जैन समुदाय की भाजपा से नाराजगी का फायदा आम आदमी पार्टी के राहुल जैन को मिल सकता है।  

पहाड़ी समुदाय साथ

भाजपा ने इस बार पहली लिस्ट में ही नौ पहाड़ी चेहरों को मौका देकर उन्हें साथ लेने की कोशिश की है। लेकिन इसके बाद भी पहाड़ी समुदाय को लगता है कि दक्षिणी दिल्ली और नजफगढ़ जिले में पहाड़ी उम्मीदवारों की संख्या बढाकर समुदाय को ज्यादा बेहतर सम्मान दिया जा सकता था। यह केवल सम्मान देने की बात नहीं, बल्कि जीत सुनिश्चित करने की बात भी है, क्योंकि इस इलाके में पहाड़ी समुदाय हार-जीत तय करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

विधानसभा चुनाव में मनीष सिसोदिया को कड़ी टक्कर देने वाले रवि सिंह नेगी को भाजपा ने विनोद नगर की सीट से ही पार्षद उम्मीदवार के रूप में उतार दिया है, जिससे मनीष सिसोदिया की अपने गृह क्षेत्र में आप उम्मीदवारों को जिताने की चुनौती बढ़ गई है। पार्टी ने रवि सिंह के सामने पहाड़ी चेहरे कुलदीप भंडारी को मैदान में उतार दिया है। पहले कांग्रेस में रहे कुलदीप भंडारी को ‘पैसे वाला’ उम्मीदवार माना जाता है। वे भाजपा के समीकरण को अपने स्थानीय संपर्कों के बल पर पलटने की क्षमता रखते हैं।    

इसी प्रकार संत नगर की पहाड़ी बहुल सीट पर भाजपा ने रेखा रावत को उतारा है। आम आदमी पार्टी ने यहां से रूबी रावत को मैदान में उतारकर मामला पहाड़ी समुदाय की आपस की लड़ाई में तब्दील कर दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें