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एक ही तारीख को जन्मी हैं माया-डिंपल, 2017 में दोनों के पास 'जीत की कुंजी'

Sun, 15 Jan 2017 02:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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डिंपल यादव और मायावती
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उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर बीते कई साल से समाजवादी पार्टी की लड़ाई बहुजन समाजवादी पार्टी से रही है। इस बार मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी भी है, लेकिन सपा और बसपा कभी भी बढ़त बनाने की स्थिति में रहती हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस बार मिलकर चुनाव लड़ेंगी और इसके लिए गठबंधन की रूपरेखा प्रियंका गांधी और डिंपल यादव तैयार कर रही हैं।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से सांसद हैं और पहली बार किसी बड़ी भूमिका में नजर आ रही हैं। वहीं, मायावती सबसे पहले उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करके 2017 के चुनाव मैदान के लिए कमर कस चुकी हैं।

मायावती और डिंपल यादव दोनों का जन्म 15 जनवरी को ही हुआ है। मायावती का जन्म जहां साल 1956 में हुआ, वहीं डिंपल का जन्म 1978 में हुआ था। दोनों की उम्र में तकरीबन 22 साल का फासला है। मायावती जहां 4 बार सूबे की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, वहीं डिंपल यादव दो बार सांसद रह चुकी हैं। साल 2017 के चुनाव में दोनों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। 
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मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार, 2017 में अखिलेश यादव और राहुल गांधी मिलकर चुनाव लड़ेंगे और इसके लिए प्रियंका गांधी और डिंपल यादव के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। अगर यह गठबंधन होता है, तो इसमें डिंपल यादव की बड़ी भूमिका रहेगी।

वहीं, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कई कार्यकर्ता होर्डिंग-पोस्टर में नारा भी लगाते रहे हैं 'विकास का पहिया अखिलेश भैया और विकास की चाबी डिंपल भाभी।' इससे साफ है कि यूपी के चुनावी अखाड़े में डिंपल यादव का कद बढ़ने लगा है।
 

जानें क्या है दोनों की प्रोफाइल

मायावती, डिंपल और प्रियंका
मायावती ने अपनी मजबूत छवि का निर्माण अपने व्यक्तित्व और नेतृत्व के बल पर किया है। साल 1977 में दलित नेता कांशीराम से जुड़कर वह दलित और पिछड़े तबकों की लड़ाई लड़ने लगीं। जल्द ही वह कमजोर और दलित वर्गों के उत्थान का चेहरा बन गईं। इन वर्गों के मतदाताओं पर उनकी एक मजबूत पकड़ है और 2017 के चुनाव में भी उनकी पार्टी को मजबूत स्थिति में देखा जा रहा है।

साल 20017 में भी मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग का कार्ड खेला है। उन्होंने दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम नेताओं के साथ-साथ बाकी जातियों को भी टिकट में खास हिस्सेदारी दी है। उन्होंने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसका जिक्र किया था, जिस पर विरोधी पार्टियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। मायावती चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं और कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वह अंतिम समय में भी उलटफेर कर सकती हैं।

वहीं, डिंपल यादव और प्रियंका गांधी की जोड़ी को सपा और कांग्रेस के लोग उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। डिंपल साल 2014 में संसद में महिला सशक्तिकरण पर चर्चा के दौरान अपने भाषण से चर्चा में आई थीं। महिला और बच्चों के स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर यूपी में काफी सक्रिय रही हैं। अपने पति और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में बराबर हिस्सा लेती रही हैं।
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साल 2017 चुनाव में दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण

मायावती और डिंपल यादव
उत्तर प्रदेश की चार बार की मुख्यमंत्री मायावती दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से ग्रेजुएट और गाजियाबाद (मेरठ यूनिवर्सिटी) से शिक्षा स्नातक (बीएड) की उपाधि प्राप्त की हैं। कांशीराम के नेतृत्व में राजनीति में आगे बढ़ी मायावती साल 1995 में प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। 2006 में कांशीराम के निधन के बाद वह बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष बन गईं।

कन्नौज से सांसद डिंपल यादव के पिता आर्मी ऑफिसर रह चुके हैं। वह लखनऊ यूनिवर्सिटी से कॉमर्स विषय से ग्रेजुएट हैं। बचपन में ही उनकी दोस्ती अखिलेश यादव से हो गई थी और बाद में दोनों ने शादी की। डिंपल यादव साल 2012 में कन्नौज लोकसभा सीट से चुनकर संसद पहुंचीं। 

2017 चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत आगे किसी भी करवट बैठे, लेकिन दोनों महिला नेताओं की भूमिका बढ़नी तय है। 
 
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