देशभर में 16 जनवरी से ही टीकाकरण को हथियार बनाकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ी जा रही है। टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुए बीते शुक्रवार तक सात दिन पूरे हो गए। इस दौरान एक करोड़ में से 12.97 लाख स्वास्थ्य कर्मियों (13%) को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है। हालांकि, इनमें से 1,116 लोगों में वैक्सीन के हल्के-फुल्के साइड इफेक्ट भी देखने को मिले जो कि टीका लगवाने वाले कुल स्वास्थ्य कर्मियों के केवल 0.09% हैं।
इन सात दिनों में टीकाकरण अभियान में उत्तर भारतीय राज्यों के लोगों से ज्यादा दक्षिण के राज्यों में रह रहे लोगों ने हिस्सा लिया। आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 38272 लोगों को टीका लग चुका है। इसके अलावा कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1.83 लाख और आंध्र प्रदेश में 1.27 लाख टीके लग चुके हैं जबकि दिल्ली, पंजाब और झारखंड में रफ्तार धीमी है। दुनिया में सबसे पहले ब्रिटेन में आठ दिसंबर से वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू हुआ था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसरों का कहना है कि सोमवार से टीकाकरण कार्य तेज होगा, तब भारत सबसे ज्यादा टीके लगाने वाला दुनिया का छठा देश बन सकता है।
एक हफ्ते पहले भारत टीकाकरण शुरू करने वाला दुनिया का 31वां देश था, लेकिन अब तक लगे कुल टीकों की संख्या के हिसाब से भारत सबसे ज्यादा टीके लगाने वाला दुनिया का आठवां देश बन गया है। भारत में रोज औसतन 2 लाख से कम टीके लग रहे हैं। केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि अगले एक सप्ताह में वैक्सीन लगाने की संख्या दोगुनी की जाएगी। सरकार का अनुमान है कि फरवरी के अंत तक सभी स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगा दिए जाएंगे।
डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए ) टीका लगवाने वालों की संख्या बढ़ाने के लिए एक पहल कर रही है। आईएमए के महासचिव डॉ. जयेश लेले ने बताया कि अपनी सभी 1800 शाखाओं के साढ़े तीन लाख डॉक्टर मोटिवेट रहें इसलिए वे वैक्सीन लगवाते समय सेल्फी लेंगे। सभी फोटो स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे जाएंगे। मंत्रालय इन फोटो को जारी करेगा, ताकि लोगों का भरोसा और मजबूत हो। इसके लिए दिल्ली के आईएमए मुख्यालय में एक बड़ा डिजिटल बोर्ड लगाया गया है, जिस पर लिखा है, ‘डोन्ट हेजिटेट, वैक्सीनेट’, यानी हिचकिचाएं नहीं, वैक्सीन लगाएं। ऐसे पोस्टर राज्यों में भी लगाए जा रहे हैं।