उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के संकल्प के साथ भाजपा की रविवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शुरुआत हो गई। कानून व्यवस्था के साथ हिंदुत्व के मुद्दे पर भी राज्य की अखिलेश सरकार को घेरने में जुटी पार्टी ने इस दौरान मथुरा हिंसा के साथ-साथ कैराना से कथित तौर पर हिंदुओं के पलायन को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने का स्पष्ट संकेत दिया।
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कार्यकारिणी बैठक: मथुरा हिंसा और कैराना को उत्तर प्रदेश में मुद्दा बनाएगी भाजपा
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद/ PTI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए बीते लोकसभा चुनाव में पार्टी के समर्थन में आए उबाल और इसके बाद बनाए गए 11 करोड़ सदस्यों को बरसात की पानी की तरह संरक्षित करने की जरूरत बताई।पीएम मोदी और शाह ने इस दौरान मिशन यूपी के बाद अगले लोकसभा चुनाव की भी याद दिलाई। दोनों नेताओं ने दावा किया कि देश के राजनीतिक फलक पर भाजपा का विस्तार कांग्रेस के क्षीण होने के कारण नहीं बल्कि पार्टी की विचारधारा, समर्पण और आचरण के कारण संभव हुआ है।
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पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बैठक को संबोधित करते मथुरा हिंसा और कैराना मामले में राज्य सरकार पर आपराधिक निष्क्रियता बरतने का आरोप लगाया। शाह ने इस दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने भाषण में प्रधानमंत्री को मुस्लिम देशों सऊदी अरब और अफगानिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने और अमेरिकी कांग्रेस में पीएम मोदी द्वारा संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की योगदान की चर्चा का जिक्र खासतौर पर किया।
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शाह ने मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि खासतौर से नए साल में पार्टी अपने लिए कमजोर माने जाने वाले राज्यों में विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया है। असम में जीत ने पूर्वोत्तर में भाजपा के द्वार खोल दिए हैं तो केरल और पश्चिम बंगाल में हम बड़ी ताकत बन कर उभरे हैं। इसका श्रेय मोदी सरकार के कामकाज और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा अब महज कुछ राज्यों और कुछ वर्गों की पार्टी नहीं है।
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भाजपा का जलवा अब कश्मीर से कन्या कुमारी और कच्छ से गुवाहाटी तक दिख रहा है। शाह ने मथुरा हिंसा और कैराना मामले में अखिलेश सरकार पर आपराधिक लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि मथुरा और कैराना की घटना बताती है कि यूपी में विकास का अभाव ही नहीं बल्कि शांति पूरी तरह से खत्म हो गई है। सूबे में सपा ने हिंसा का माहौल बना दिया है। दोनों घटना राज्य सरकार की असमर्थता को साबित करने के लिए काफी है।
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पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए पीएम ने भाजपा को साल 2014 में मिले प्रचंड समर्थन और 11 करोड़ सदस्यों की बदौलत दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनने की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जरूरत समर्थन के सैलाब और करोड़ों सदस्यों को बरसात की पानी की तरह संरक्षित करने की है। इस दौरान उन्होंने मिशन यूपी के साथ ही अगले लोकसभा चुनाव की भी याद दिलाई।
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उन्होंने कहा कि मतदाता और सदस्य के रूप में पार्टी से जुड़े लोगों को अगले लोकसभा चुनाव तक सहेज कर रखने के लिए इन्हें पार्टी और सरकार के सामाजिक कार्यों और अभियानों से जोड़ा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस दौरान संगठन और पार्टी के विस्तार और मजबूती के लिए समय के अनुरूप बदलाव का भी सुझाव दिया।
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2017 में उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें इसके बाद आने वाले लोकसभा चुनाव का भी ख्याल रखना चाहिए। पीएम ने इस दौरान राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद प्रदेश कार्यकारिणी और जिला कार्यकारिणी की बैठक के माध्यम से सरकार की उपलब्धियां लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाने का भी आह्वान किया।
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वहीं भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नेतृत्व जुलाई मध्य के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तृत मंथन करेगा। इस दौरान न सिर्फ चुनावी चेहरे पर चर्चा होगी, बल्कि भाजपा नेतृत्व राज्य की चुनावी रणनीति से भी संघ नेतृत्व को अवगत कराएगा। गौरतलब है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के एजेंडे में राज्य के चुनावी चेहरा संबंधी मुद्दा शामिल न होने के बावजूद इस पर रविवार को कयासों का बाजार गर्म रहा।
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पार्टी सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पार्टी का चेहरा बनाने पर कोई फैसला नहीं हुआ है, मगर उन्हें इस आशय का प्रस्ताव दिया गया था। पार्टी के चुनावी चेहरे के सवाल पर महज इतना कहा कि फिलहाल उसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करना है। संघ से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि उत्तर प्रदेश की संपूर्ण चुनावी रणनीति पर भाजपा और संघ नेतृत्व के बीच जुलाई मध्य के बाद चर्चा होगी।
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इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महासचिव रामलाल का शिरकत करना तय है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी बैठक में शामिल होने की पूरी संभावना है। उक्त नेता के मुताबिक वर्तमान में देश भर में संघ शिक्षा वर्ग जारी है। हर साल की तरह इस साल भी संघ नेतृत्व जुलाई मध्य केआसपास अपने अनुशांगिक संगठनों और भाजपा के साथ समीक्षा बैठक आयोजित करेगा। इसी बैठक में उत्तर प्रदेश पर विस्तार से चर्चा होगी।
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बैठक में भाजपा नेतृत्व इस चुनाव के संदर्भ में संघ से अपनी अपेक्षा को भी सामने रखेगा। गौरतलब है कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी स्थल इलाहाबाद में खासतौर पर मुख्यमंत्री के चेहरे पर लगातार चर्चा हो रही है। वरुण गांधी, योगी आदित्यनाथ के समर्थकों ने पोस्टरों के माध्यम से इनकी दावेदारी पेश की है। जबकि राजनाथ समर्थक अब चेहरा पेश कर चुनाव मैदान में उतरने से हुए नुकसान का हवाला दे रहे हैं।
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संघ से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि उत्तर प्रदेश की संपूर्ण चुनावी रणनीति पर भाजपा और संघ नेतृत्व के बीच जुलाई मध्य के बाद चर्चा होगी। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महासचिव रामलाल का शिरकत करना तय है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी बैठक में शामिल होने की पूरी संभावना है। उक्त नेता के मुताबिक वर्तमान में देश भर में संघ शिक्षा वर्ग जारी है।
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हर साल की तरह इस साल भी संघ नेतृत्व जुलाई मध्य केआसपास अपने अनुशांगिक संगठनों और भाजपा के साथ समीक्षा बैठक आयोजित करेगा। इसी बैठक में उत्तर प्रदेश पर विस्तार से चर्चा होगी।राजनाथ, जिन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने की पेशकश किए जाने की चर्चा है के समर्थकों का कहना है कि इससे पहले पार्टी ने कल्याण सिंह और राजनाथ को प्रत्यक्ष तो उमा भारती को परोक्ष रूप से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पार्टी चारो खाने चित गिरी थी।
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उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के बाद भाजपा की अगली राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक संभवत: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होगी। रविवार से शुरू हुई कार्यकारिणी की बैठक में अगली बैठक 23 से 25 सितंबर के बीच करने का फैसला हुआ है। बैठक के लिए अन्य चुनावी राज्यों हिमाचल प्रदेश, गुजरात और पंजाब ने भी दावेदारी जताई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हालांकि स्थान पर अभी फैसला नहीं हुआ है, मगर दावेदारी में उत्तराखंड का पलड़ा भारी है।
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भारतीय जनता पार्टी कार्यकारिणी की यह बैठक पहले गुवाहाटी में होनी थी लेकिन उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी के रणनीतिकारों ने बैठक का स्थान बदलने का निर्णय लिया। जिस पर सभी ने एकमत से सहमति जताई और कार्यसमिति की बैठक के लिए इलाहाबाद शहर को चुना गया।
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भाजपा सूत्रों के मुताबिक कार्यकारिणी की इस बैठक के लिए पहले गुवाहाटी को चुना गया था। यूपी में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के रणनीतिकारों ने यह तय किया कि जून में होने वाली यह बैठक मिशन यूपी की शुरुआत के लिए सही समय होगा।
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फिर राय मशविरा कर बैठक के लिए इलाहाबाद के नाम पर मुहर लग गई। मिशन यूपी को साधने के लिए इलाहाबाद कई मायने में भाजपाइयों के लिए मुफीद था। इलाहाबाद में कार्यकारिणी बैठक और रैली के जरिए भाजपा यूपी विधानसभा चुनाव का शंखनाद भी कर रही है।
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भारतीय जनता पार्टी कार्यसमिति की बैठक के लिए केपी इंटर कॉलेज मैदान का चयन सोची समझी रणनीति के तहत किया गया। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुछ खास लोगों के साथ कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह से भी स्वागत कराना इसी कड़ी का हिस्सा है, क्योंकि भाजपा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इलाहाबाद के साथ पूरे प्रदेश में सवर्ण खासकर कायस्थ मतदाताओं को अपने पक्ष में करना चाहती है। उत्तर प्रदेश में कायस्थ मतदाताओं की संख्या 15-18 लाख के बीच है।
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इसमें से 80 हजार से एक लाख के आसपास कायस्थ मतदाता अकेले इलाहाबाद में हैं, जबकि कायस्थ पाठशाला के ट्रस्टियों की संख्या 28000 है। माना जा रहा है कि इस बड़े मतदाता वर्ग को साधने के लिए ही भाजपा ने कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष को विशेषतौर पर बुलाकर प्रधानमंत्री का सम्मान कराया। इसके पहले सांसद केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी देते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को साधने का प्रयास किया। मतदाताओं के दो बड़े वर्गों को अपने साथ लाने की तैयारी से साफ है कि सपा, बसपा समेत कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध मारना है।
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कार्यक्रम में आए केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि यूपी चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ही लड़ा जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी बेहतर काम कर रहे हैं। पार्टी यहां पूरी रणनीति से चुनाव लड़ेगी। यह भी तय है कि लोकसभा चुनाव की तर्ज पर पार्टी को यूपी विधानसभा चुनाव में भी भारी सफलता मिलेगी। प्रदेश की सपा सरकार से जनता पूरी तरह से ऊब चुकी है। आम जनता भयग्रस्त है। कानून व्यवस्था भी पटरी से उतर गई है। मेरठ के पास कैराना में हिंदू परिवारों का पलायन करना इसका जीता जागता उदाहरण है। प्रदेश सरकार इस बारे में अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। सपा और बसपा से ऊब चुकी यूपी की जनता यह तय कर चुकी है कि वर्ष 2017 में भाजपा का ही परचम लहराना है।