केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के नए निदेशक के लिए दौड़ शुरू हो गई है। इस दौड़ में 1982 से 1985 बैच के सीनियर आईपीएस शामिल हैं। फिलहाल जो नाम सामने आ रहे हैं, उनमें कई आईपीएस तो अपने समय में खासे चर्चित रहे हैं। किसी को 'जासूसों का मास्टर' कहा जाता है तो कोई 'कैंब्रिज विश्वविद्यालय' से पीएचडी करने के बाद इंडियन पुलिस सर्विस में आया हैं। मुंबई के पुलिस कमिश्नर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुबोध कुमार जायसवाल को 'जासूसों का मास्टर' कहा जाता है।
उन्होंने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं। इनका नाम भी सीबीआई निदेशक के लिए चल रहा है। दूसरे अधिकारी, सीआईएसएफ के डीजी राजेश रंजन हैं। इन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है और इंटरपोल के पहले असिटेंट डायरेक्टर होने का गौरव भी हासिल किया है। तांत्रिक चंद्रास्वामी को गिरफ्तार करने से लेकर रुचिका छेड़छाड़ मामले में पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को सलाखों के पीछे भेजने जैसे कई कारनामें इनके नाम पर हैं।
बता दें कि गृह मंत्रालय ने सीबीआई निदेशक पद के लिए दिसंबर माह में ही एक दर्जन से अधिक आईपीएस अफसरों की सूची डीओपीटी को भेज दी थी। इस सूची में एनआईए के डीजी वाईसी मोदी, सीआईएसएफ के डीजी राजेश रंजन, बीएसएफ के डीजी रजनीकांत मिश्र और मुंबई के पुलिस आयुक्त सुबोध जायसवाल का नाम प्रमुखता से शामिल किया गया है। इनके अलावा गृह मंत्रालय में स्पेशल सेक्रेटरी (इंटरनल सेक्योरिटी) के पद पर कार्यरत 1993 बैच की आईपीएस रीना मित्रा, यूपी के डीजी ओपी सिंह, सीआरपीएफ के डीजी राजीव भटनागर और रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी विवेक जौहरी का नाम भी डीओपीटी के पास भेजा गया है। रीना मित्रा अपने करियर में केवल एसपी रहते हुए सीबीआई में पोस्टेड रही हैं।
टॉप में किसका नाम चल रहा है...
सीबीआई निदेशक का चयन करने के लिए सेलेक्ट कमेटी की बैठक 24 जनवरी को होने जा रही है। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, जबकि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बतौर सदस्य इस बैठक में मौजूद रहेंगे।
सूत्रों का कहना है कि सुबोध कुमार जायसवाल, रजनीकांत मिश्र, वाईसी मोदी और राजेश रंजन का नाम टॉप पर है। जायसवाल ने अपने करियर में कई बड़े मामलों की जांच की है। मुंबई पुलिस में वे करोड़ों रुपये के जाली स्टंप पेपर घोटाले की जांच करने वाले विशेष दल के प्रमुख थे। साल 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले की जांच जायसवाल ने ही की थी। गत वर्ष राज्य सरकार ने पत्र लिखकर जायसवाल से पूछा था कि क्या वह महाराष्ट्र वापस आना चाहते हैं। उनके हां कहने के बाद ही उन्हें मुंबई पुलिस आयुक्त बनाया गया था। दूसरे नंबर पर एनआईए के डीजी वाईसी मोदी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में गुजरात दंगों की जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय जांच टीम में वाईसी मोदी शामिल थे। तीसरे स्थान पर राजेश रंजन हैं। उन्होंने सीबीआई में लम्बे समय तक काम किया है। यूपी के पुलिस प्रमुख ओपी सिंह का नाम भी चल रहा है, लेकिन उन्होंने सीबीआई में काम नहीं किया है। हालांकि जायसवाल भी केवल रॉ में तैनात रहे हैं। वाईसी मोदी, राजेश रंजन और रजनीकांत मिश्र का सीबीआई में काम करने का सबसे ज़्यादा अनुभव है।