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मसूद अजहर पर बैन को लेकर भारत ने चीन को दी नसीहत

Wed, 22 Feb 2017 10:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित करने की कोशिशों पर चीन द्वारा 'पुख्ता सबूतÓ मांगने पर भारत ने उसे दो टूक जवाब दिया है। भारत ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा पहले ही दिया जा चुका है और उसी आधार पर कई देशों ने उसके खिलाफ प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा था। अब सबूत देने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है।
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बुधवार को सामरिक वार्ता के दौरान विदेश सचिव एस जयशंकर और चीन के शीर्ष अधिकारियों के बीच मसूद और एनएसजी के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर ने बताया कि यह वार्ता काफी उपयोगी रही है और भारतीय प्रमुख मसलों पर अपनी चिंताओं और प्राथमिकताओं से चीन को अवगत करा दिया है। 

मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए इस साल अमेरिका द्वारा रखे गए प्रस्ताव का जिक्र करते हुए विदेश सचिव ने कहा, 'मसूद पर 1267 कमेटी के प्रतिबंध के मुद्दे पर हमने दोबारा उस प्रस्ताव के औचित्य को स्पष्ट किया जिसे अकेले भारत द्वारा नहीं, कई दूसरे देशों द्वारा भी रखा गया है।' गौरतलब है कि मसूद पर अमेरिका के प्रस्ताव को यूके और फ्रांस ने भी अपना समर्थन दिया था। 
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एनएसजी पर नहीं बदला चीन का रुख

48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता को व्यापक समर्थन मिल रहा है। चीन के रुख को लेकर जयशंकर ने कहा, 'चीनी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि भारत की सदस्यता को लेकर उसका रुख काफी स्पष्ट है। प्रक्रियाओं पर उनका अपना दृष्टिकोण है, जो फिलहाल हमारे और समूह के दूसरे सदस्यों से भिन्न है।'
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पहले से लगा है बैन, सबूत की जरूरत नहीं

s jaishankar - फोटो : s jaishankar
मसूद पर प्रतिबंध लगाने के लिए चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा 'पुख्ता सबूत' मांगने पर जयशंकर ने कहा, 'जैश-ए-मोहम्मद पर पहले से ही प्रतिबंध है। ऐसे में सबूत तो 1267 कमेटी की कार्रवाई ही है। इस केस में मसूद के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के सबूत दिए जा चुके हैं।' विदेश सचिव ने साफ कहा, 'सबूत देने के बाद अब इसके लिए राजी करने की जिम्मेदारी भारत की नहीं है।

 प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सभी देश मसूद पर बैन को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट है अन्यथा वे इस पर साथ नहीं आते।' इस मसले पर आम सहमति नहीं होने की बात पर विदेश सचिव ने कहा, 'सहमति नहीं है क्योंकि चीन अब तक साथ नहीं आया है।' चूंकि 1267 कमेटी की कार्यवाही सार्वजनिक नहीं है, इस पर उन्होंने कहा, 'हमें बताया गया है कि कमेटी में इस पर भारी समर्थन मिला है। दूसरे देशों से भी पूछा जाना चाहिए।'
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