Mars: मंगल पर उठने वाली जहरीली धूल भरी आंधियां मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। इनमें मौजूद सिलिका, परक्लोरेट्स और अन्य तत्व सांस की बीमारियों व थायरॉयड समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
मंगल ग्रह पर मानव मिशन भेजने की तैयारी जोरों पर है। नासा और चीन की मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी (सीएमएस) आने वाले दशकों में मंगल पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना बना रही हैं, लेकिन जर्नल जियोहेल्थ में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, मंगल की जहरीली धूल भरी आंधियां इन अभियानों की सफलता और अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती हैं।
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यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया (यूएससी) के केक स्कूल ऑफ मेडिसिन, यूसीएलए स्पेस मेडिसिन सेंटर और नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। शोध में पाया गया कि मंगल की सतह पर मौजूद धूल बेहद महीन और इलेक्ट्रोस्टैटिक रूप से चार्ज होती है। इसमें सिलिका, परक्लोरेट्स, जिप्सम और नैनोफेज आयरन ऑक्साइड जैसे खतरनाक तत्व होते हैं। यदि ये कण सांस के जरिये शरीर में प्रवेश कर जाएं तो गंभीर सांस की बीमारियां, थायरॉयड की समस्याएं और अन्य घातक विकार उत्पन्न कर सकते हैं।
रोबोटिक मिशनों के लिए भी आसान नहीं राह
हर तीन मंगल वर्ष यानी पृथ्वी पर लगभग साढ़े पांच वर्ष में ये आंधियां पूरे ग्रह को घेर लेती हैं और पृथ्वी से भी नजर आती हैं। पहले ही ये तूफान रोबोटिक मिशनों के लिए गंभीर चुनौती साबित हो चुके हैं। 2018 में नासा का ऑपरच्यूनिटी रोवर एक विशाल धूल भरे तूफान में फंसकर निष्क्रिय हो गया था, क्योंकि इसके सौर पैनल धूल से ढक गए थे और ऊर्जा उत्पादन बंद हो गया था। 2022 में इनसाइट लैंडर भी इसी कारण ठप हो गया।