31 दिसंबर, 1946 को मालाबार स्पेशल पुलिस सारदा और उनकी मां के घर पहुंची। उन्हें शक था कि नारायण और उनके पिता वहां जरूर आएंगे। पुलिस ने घर तोड़कर आग के हवाले कर दिया। नारायण के वापस आने की जब सभी उम्मीदें खत्म हो गईं तो सारदा ने दूसरी शादी का फैसला किया। आठ साल बाद नारायण रिहा हुए तो पाया कि सारदा ने दूसरी शादी कर ली है। इसके बाद नारायण ने दूसरी शादी कर ली। उस शादी से उनके सात बच्चे हैं।
यादगार मुलाकात
नारायण की भतीजी लेखिका शांता कावुंबाई ने उनके जीवन पर ‘30 दिसंबर’ शीर्षक से एक किताब लिखी। इस दौरान सारदा के बेटे भार्गव की जब शांता और मधुकुमार से मुलाकात हुई तो उन्होंने अपने परिवारों के बारे में बात की। इसके बाद उन्होंने नारायण और सारदा की मुलाकात कराने का फैसला किया। कन्नूर में भार्गव के घर पर दोनों की यादगार मुलाकात हुई। नारायण ने स्नेह से सारदा का सिर थपथपाया। वहीं, सारदा कुछ नहीं बोलीं और ज्यादातर समय फर्श ही देखती रहीं।