एक ही बार में तीन तलाक कहकर रिश्ता तोड़ने की कुप्रथा पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देश की सर्वोच्च अदालत से अपील की है कि वैवाहिक बलात्कार को भी दंडनीय बनाए जाने के कदम उठाए जाएं। यही नहीं उन्होंने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की भी मांग की है।
समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता हरीश अय्यर ने कहा कि तीन तलाक पर आए फैसले से लोगों को धारा-377 जैसे कानूनों के प्रति भी उदार होना चाहिए। बता दें कि समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आईपीसी की धारा-377 का मुद्दा भी शीर्ष अदालत में लंबित है।
वहीं ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेंस एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन ने ट्वीट कर पूछा, माननीय सुप्रीम कोर्ट! क्या नाबालिग पत्नियों समेत जीवनसाथी के साथ रेप को असंवैधानिक ठहराया जाएगा।
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेन्स एसोसिएशन की पूर्व महा सचिव एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता जागमती सांगवान ने कहा कि अब पत्नी के साथ रेप के मुद्दे और धारा-377 के मसले को उठाने का समय आ गया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की कार्यक्रम निदेशक अस्मिता बसु ने कहा, तीन तलाक भेदभाव वाली प्रथा है जो महिलाओं के समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है।