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अमेरिकी विदेश मंत्री का भारत दौरा: जयशंकर से वार्ता, द्विपक्षीय समझौते पर नजर; तीन दिन के कार्यक्रम में क्या?

Tue, 20 Oct 2026 02:39 AM IST
निर्मल कांत एएनआई, नई दिल्ली।
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मार्को रुबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री - फोटो : एएनआई (फाइल)
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अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज यानी मंगलवार को आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचने वाले हैं। उनका यह दौरा तीन दिन का होगा। मध्य एशिया में हाल ही में हुई कूटनीतिक बातचीत से मिली गति के बीच वह भारत आ रहे हैं। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि लंबे समय से प्रतीक्षित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अपने आखिरी चरण में है।
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इस दौरे के दौरान रुबियो की विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। वह गुजरात के जामनगर भी जाएंगे, जो ऊर्जा क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है। इस दौरान दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

विदेश मंत्रालय (एमईए) की ओर से जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, विदेश मंत्री रुबियो मंगलवार दोपहर सवा दो बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे।
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मुंबई पहुंचने के कुछ ही देर बाद दोपहर 03:40 बजे रुबियो आतंकवादी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके लिए ऐतिहासिक होटल ताज महल पैलेस के अंदर बने ताज स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने का कार्यक्रम रखा गया है। यह एक औपचारिक और गंभीर श्रद्धांजलि समारोह होगा।

इसके बाद, दोपहर 15:50 बजे अमेरिकी विदेश मंत्री उसी स्थान पर विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अहम द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इस चर्चा में भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर बात होने की उम्मीद है।

मंगलवार शाम 18:35 बजे रुबियो जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'फ्रीडम 250 रिसेप्शन' में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में अमेरिका के इतिहास की प्रमुख उपलब्धियों और दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों का जश्न मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में मीडिया की पहुंच की व्यवस्था अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावास के जरिये की जा रही है।

बुधवार 21 अक्तूबर को रुबियो मुंबई में अपने कार्यक्रम पूरे करेंगे। इसके बाद वह गुजरात के जामनगर के लिए रवाना होंगे। वह सुबह साढ़े 10 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विमान में सवार होंगे और अपने अगले कार्यक्रमों के लिए जामनगर जाएंगे।

विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विभिन्न स्थानों पर आधिकारिक मीडिया कवरेज और तस्वीरें लेने के अवसरों को सामान्य कूटनीतिक नियमों के अनुसार नियंत्रित किया जाएगा।

इससे पहले, सोमवार को रुबियो ने संकेत दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। रुबियो इस समय उज्बेकिस्तान में हैं। वह मंगलवार को मुंबई पहुंचेंगे, जहां उनकी विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात होगी। इस सप्ताह के अंत में वह जामनगर भी जाएंगे। जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी में से एक स्थित है।

समरकंद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा, हम इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम इसके बहुत करीब हैं। 

उन्होंने आगे कहा, पिछले कुछ महीनों के दौरान हमें प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी है, क्योंकि उनका असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ रहा था। हमें इन सभी चीजों का प्रबंधन करना होगा। हम इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम इसके बहुत करीब हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रतिबंधों में छूट और इस तरह के अन्य मामलों पर राष्ट्रपति जब कोई फैसला लेते हैं, तो इन बातों को भी ध्यान में रखा जाता है। 

रुबियो ने कहा, हर देश को कई जटिल परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला लेना पड़ता है। भौगोलिक स्थिति भी वास्तविकता है। कुछ देशों के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति हासिल करना बहुत मुश्किल होता है। यह कोई बहाना नहीं है। लेकिन विदेश नीति बनाते समय इन सभी बातों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। 

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी ईंधन की बिक्री से जुड़े कई प्रतिबंधों को टाल दिया था। ये प्रतिबंध 'लिंडसे ओ. ग्राहम प्रतिबंध रूस और ईरान अधिनियम' के तहत लागू होने वाले थे। इसके एक दिन बाद रुबियो ने भारत को अमेरिका का एक अहम सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी भी तरह का शुल्क या प्रतिबंध लगाने से पहले इन जरूरतों पर विचार किया जाना चाहिए।

फिलहाल रोक दिए गए इस कानून के तहत रूस से कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े आयातक देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता था। इन देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।

रुबियो ने कहा, ये प्रतिबंध सिर्फ रूस पर नहीं लगाए जाने थे। इनमें कई देशों पर शुल्क लगाने का प्रावधान भी शामिल है। उदाहरण के लिए, भारत और कुछ अन्य देश भी इसकी चपेट में आते। इसलिए मेरा मानना है कि राष्ट्रपति 60 दिनों की अवधि का इस्तेमाल यह समझने के लिए करना चाहते हैं कि प्रतिबंध और शुल्क लगाने का वैश्विक अर्थव्यवस्था, यहां तक कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा। 

उन्होंने आगे कहा, भारत जैसे देशों ने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है। इसके बावजूद वे अब भी रूस से काफी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहे हैं, क्योंकि एक दिन में ही किसी दूसरे स्रोत की ओर रुख करना मुश्किल होता है। भारत अमेरिका का एक अहम सहयोगी और साझेदार भी है। इसलिए हमें इस पूरी स्थिति का अध्ययन करने और यह तय करने के लिए समय चाहिए कि कौन-सा तरीका सबसे सही रहेगा। 

रुबियो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडसे ग्राहम विधेयक के कानून बनने के बाद से बदलते भू-राजनीतिक हालात को भी ध्यान में रख रहे हैं। खास तौर पर सऊदी अरब और हूती लड़ाकों के बीच बढ़ते संघर्ष पर विचार किया जा रहा है।
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