मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने के बाद सांसद छत्रपति संभाजीराजे भोसले ने राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार से भी सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है।
वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार को मराठों के लिए 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। उन्होंने कहा, हर बात में केंद्र पर आरोप मढ़ना और खुद कुछ नहीं करना सही नहीं है।
संभाजीराजे भोसले छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर मांग की है कि केंद्र की तर्ज पर महाराष्ट्र सरकार भी मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे।
भाजपा सांसद भोसले ने केंद्र की याचिका का स्वागत करते हुए कहा कि यह मामला राज्य पिछड़ा आयोग से संबंधित है। इसलिए पहले की त्रुटियों को दूर करते हुए राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करे।
वहीं, शिवसंग्राम के अध्यक्ष विनायक मेटे ने कहा कि केंद्र सरकार ने मराठा समाज के हित के लिए पुनर्विचार याचिका दायर की है, जबकि महाराष्ट्र सरकार लगातार झूठ बोल रही है और लोगों को गुमराह कर रही है। दूसरी ओर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने आरक्षण मिलने तक मराठा समाज के लिए तीन हजार करोड़ का पैकेज घोषित करने की मांग की है।
राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए दायर हुई है पुनर्विचार याचिका: अशोक चव्हाण
पीडब्लूडी मंत्री व मराठा आरक्षण के लिए गठित मंत्रिमंडल की उपसमिति के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि केंद्र सरकार मराठा आरक्षण के समर्थन में नहीं दिखाई दे रही है। केंद्र ने केवल यह बताने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है कि यह राज्य सरकार का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अगर केंद्र सरकार ने ठोस पहल की होती तो पुनर्विचार याचिका की नौबत नहीं आती। चव्हाण ने कहा कि केंद्र की याचिका राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए है।
सब कुछ केंद्र सरकार करेगी तो क्या हम केवल मक्खी मारेंगे: फडणवीस
अशोक चव्हाण के बयान पर विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर सब कुछ केंद्र सरकार ही करेगी तो क्या हम सब (राज्य सरकार) केवल मक्खी मारेंगे। ऐसे में तो मराठा समाज के लिए आरक्षण का जो प्रावधान किया गया है वह भी खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी असफलता के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने की नौटंकी कर रही है, जो बंद होनी चाहिए। चव्हाण को कानून की जानकारी लेनी चाहिए।