मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस इस समय मराठा आरक्षण को लेकर काफी विरोध का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा कि वह इस मामले को लेकर प्रतिबद्ध हैं और ऐसा कोई काम नहीं करना चाहते जो कोर्ट में ना टिक सके। इस मामले पर दूसरी प्रगति यह है कि मराठा आरक्षण पर कैबिनेट की सब-कमिटी जिसके अध्यक्ष मंत्री चंद्रकांत पाटिल हैं, उन्होंने फैसला हर जिले में एक समिति बनाई जाएगी।
इस समिति के 10 सदस्य सरकारी और 10 मराठा क्रांति मोर्चा के होंगे जो सरकार द्वारा इस समुदाय को दिए जाने वाले लाभ को मॉनिटर करने का काम करेंगे। इस मसले पर सरकार ने दूसरा फैसला यह लिया है कि अन्नाभाऊ साठे डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन के अंतर्गत मराठा युवाओं द्वारा लिए जाने वाले कर्ज का गारंटर बनेगी। समुदाय ने आरोप लगाया है कि बैंक उन्हें कर्ज देने से मना कर रहे हैं और काउंटर-गारटंर की मांग कर रही है।
इसके अलावा मराठा छात्रों के लिए पुणे में एमपीएससी और यूपीएससी के लिए कोचिंग सेंटर खोला जाएगा। एक किताब के लॉन्च होने के मौके पर पहुंचे
देवेंद्र फणनवीस ने इस मसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मराठाओं को 16 प्रतिशत आरक्षण देने वाले विधेयक को पास करने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। हमारे लिए विधेयक को पास करना बहुत आसान है। यह एक दिन में हो सकता है लेकिन यह कोर्ट में नहीं टिकेगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'यह अपने समुदाय के साथ धोखा करने जैसा होगा, जो हम करना नहीं चाहते हैं। हम इस तरह का
आरक्षण देंगे जो कानूनी तौर पर उचित होगा। लोगों के बीच गुस्सा और नाराजगी है। जिसकी वजह से कई जगहों पर हिंसा हुई है और कई मामलों में युवाओं ने आत्महत्या की है। इससे आपको आरक्षण नहीं मिलेगा।' आंदोलन की वजह से सरकारी और निजी संपत्ति को 8-10 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने 4-5 हजार आंदोलनकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है।