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Mumbai: मराठा सेनापति रघुजी भोंसले की तलवार मुंबई लाई गई, लंदन में हुई नीलामी में महाराष्ट्र सरकार ने हासिल की

Mon, 18 Aug 2025 03:22 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

ऐसा माना जाता है कि यह तलवार 1817 के सीताबुल्दी युद्ध के दौरान भारत से बाहर ले जाई गई थी, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठाओं को हराया था।
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रघुजी भोंसले की तलवार के साथ आशीष शेलार - फोटो : एक्स/इंडिया इन यूके
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विस्तार
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प्रसिद्ध मराठा सेनापति रघुजी भोंसले प्रथम की प्रसिद्ध तलवार सोमवार को मुंबई पहुंच गई। इस तलवार को महराष्ट्र सरकार ने हाल ही में लंदन में आयोजित हुई नीलामी में हासिल किया। राज्य के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने बताया कि तलवार को पी.एल. देशपांडे अकादमी में रखा जाएगा, जहां आम लोग भी तलवार देख सकेंगे। 
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बारिश के कारण बाइक रैली रद्द की गई
आशीष शेलार ने कहा कि तलवार को सुबह लगभग 10 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक विमान से लाया गया। वहां से तलवार को प्रभादेवी स्थित पी.एल. देशपांडे अकादमी ले जाया गया। उन्होंने बताया कि भारी बारिश और यातायात जाम के कारण तलवार को हवाई अड्डे से ले जाने के लिए आयोजित बाइक रैली रद्द कर दी गई। शाम को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा अजित पवार की उपस्थिति में होने वाला एक कार्यक्रम निर्धारित समय पर आयोजित किया जाएगा।

1817 में भारत से बाहर गई ये ऐतिहासिक तलवार
नागपुर भोंसले राजवंश के संस्थापक और छत्रपति शाहू महाराज के शासनकाल में मराठा सेना के एक प्रमुख सेनापति रहे रघुजी भोंसले प्रथम की तलवार को कुछ समय पहले एक अंतरराष्ट्रीय नीलामी में महाराष्ट्र सरकार ने हासिल किया था। इस प्रतिष्ठित तलवार को लंदन में एक नीलामी में 47.15 लाख रुपये में अधिग्रहित किया गया था। ऐसा माना जाता है कि यह तलवार 1817 के सीताबुल्दी युद्ध के दौरान भारत से बाहर ले जाई गई थी, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठाओं को हराया था।
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महाराष्ट्र के मंत्री तलवार लेने खुद लंदन गए
इस तलवार की नीलामी की खबर 28 अप्रैल को सामने आई। जिसके बाद लंदन स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया गया और नीलामी में भाग लेने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त किया गया। शेल्लार ने बताया कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने और व्यक्तिगत रूप से कलाकृति को अपने कब्जे में लेने के लिए वे खुद लंदन गए थे। मंत्री ने इस अधिग्रहण को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक जीत बताया। शेल्लार को तलवार सौंपे जाने के समय लंदन में बड़ी संख्या में मराठी भाषी नागरिक मौजूद रहे। पुरातत्व विभाग के उप निदेशक हेमंत दलवी भी इस यात्रा के दौरान मंत्री के साथ थे।
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मराठा संस्कृति का प्रतीक
नागपुर भोसले राजवंश के संस्थापक रघुजी भोंसले प्रथम (1695-1755) को छत्रपति शाहू महाराज ने उनके सैन्य कौशल के लिए 'सेनासाहब सुभा' की उपाधि प्रदान की थी। भोंसले ने 1745 और 1755 में बंगाल के नवाब के विरुद्ध अभियानों का नेतृत्व किया था, जिससे मराठाओं का प्रभाव बंगाल और ओडिशा तक फैल गया था। यह तलवार मराठा 'फिरंग' शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें एक सीधी, एकधारी यूरोपीय निर्मित धार, मुल्हेरी मूठ पर सोने की सजावट और मूठ के पास देवनागरी में एक शिलालेख है, जिस पर 'श्रीमंत राघोजी भोंसले सेनासाहब सुभा फिरंग' लिखा है। राज्य सरकार ने कहा कि यह हथियार मराठा सैन्य विरासत और उस काल की शिल्पकला, दोनों का प्रतीक है। इसकी वापसी महाराष्ट्र के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक क्षण बन गई है।



 
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